Science Behind Fear: शेर-चीते से नहीं, छिपकली को देख क्यों छूटते हैं पसीने? जानिए इंसानी दिमाग का वो हिस्सा जो पैदा करता है खौफ

Science Behind Fear: नई दिल्ली। दैनिक जीवन में अक्सर यह देखा जाता है कि कई लोग, विशेषकर महिलाएं और बच्चे, घोड़े, कुत्ते या अन्य बड़े जीवों के साथ बेहद सहजता से रह लेते हैं। लेकिन जैसे ही कमरे की दीवार पर एक छोटी सी छिपकली दिखाई देती है, उनकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है। अचानक चीखना, घबरा जाना या कमरे से बाहर भाग जाना एक आम प्रतिक्रिया है।

चौंकाने वाली बात यह है कि छिपकली न तो इंसानों पर हमला करती है और न ही आमतौर पर काटती है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस लगभग नुकसान न पहुंचाने वाले छोटे से जीव से इंसानों को इतना डर क्यों लगता है? विज्ञान और मनोवैज्ञानिकों के पास इसका बेहद सटीक जवाब है, जो सीधे हमारे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली से जुड़ा हुआ है।

दिमाग का ‘अलार्म सिस्टम’: कैसे एक्टिव होता है डर?

न्यूरो-एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह डर कोई मानसिक कमजोरी नहीं है, बल्कि इंसानी दिमाग के भीतर मौजूद एक ऑटोमैटिक सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा है।

जब हमारी आंखें किसी ऐसी चीज को देखती हैं जिसे अतीत में या अवचेतन मन में ‘खतरा’ माना गया है, तो मस्तिष्क का एक खास हिस्सा सक्रिय हो जाता है, जिसे एमिग्डाला (Amygdala) कहा जाता है।

  • भावनाओं का नियंत्रण: एमिग्डाला हमारे मस्तिष्क में भावनाओं और मुख्य रूप से ‘डर’ की भावना को नियंत्रित करता है।

  • फाइट या फ्लाइट रिस्पॉन्स: छिपकली को देखते ही एमिग्डाला शरीर में ‘फाइट या फ्लाइट’ (मुकाबला करो या भागो) की स्थिति पैदा कर देता है।

  • हार्मोन का रिसाव: इस प्रतिक्रिया के शुरू होते ही शरीर में एड्रेनालिन (Adrenaline) जैसे तनाव हार्मोन तेजी से रिलीज होने लगते हैं। इसी वजह से व्यक्ति की सांसें तेज हो जाती हैं, दिल धड़कने लगता है और हथेलियों में पसीना आने लगता है।

असली और आभासी खतरे का भ्रम: क्या कहती है चार्ल्स यूनिवर्सिटी की रिसर्च?

प्रसिद्ध चार्ल्स यूनिवर्सिटी (Charles University) के वैज्ञानिकों के एक शोध के मुताबिक, हमारा तार्किक दिमाग यह जानता है कि छिपकली जहरीली नहीं है या वह हमें नुकसान नहीं पहुंचाएगी, लेकिन हमारा आदिम मस्तिष्क (Primitive Brain) हर बार असली खतरे और केवल महसूस होने वाले ‘आभासी खतरे’ के बीच तुरंत अंतर नहीं कर पाता है।

वहीं, अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) का कहना है कि इसे ‘स्पेसिफिक फोबिया’ (Specific Phobia) की श्रेणी में रखा जाता है। फोबिया से पीड़ित व्यक्ति का डर वास्तविक खतरे की तुलना में कई गुना अधिक बड़ा होता है, लेकिन उस क्षण उस व्यक्ति के लिए वह डर और घबराहट 100% सच होती है।

कैसे और क्यों पनपता है छिपकली का यह खौफ?

मनोवैज्ञानिकों ने इस डर के पनपने के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए हैं:

  1. बचपन के अनुभव और सामाजिक सीख: कई बार बचपन में छिपकली के अचानक शरीर पर गिर जाने या सामने आ जाने का कोई बुरा अनुभव दिमाग में दर्ज हो जाता है। इसके अलावा, बच्चे अपने माता-पिता या बड़ों को छिपकली देखकर डरते और चीखते हुए देखते हैं, तो उनका दिमाग भी अवचेतन रूप से यह सीख लेता है कि यह एक खतरनाक जीव है।

  2. अचानक होने वाली तेज हलचल: इंसानी दिमाग का विकास इस तरह हुआ है कि वह उन जीवों के प्रति ज्यादा सतर्क और आक्रामक रहता है जो बिना किसी चेतावनी के अचानक बहुत तेजी से दिशा बदलते हैं या दौड़ते हैं। छिपकली का दीवार पर स्थिर रहकर अचानक बिजली की फुर्ती से दौड़ना हमारे सुरक्षा तंत्र को चौंका देता है।

  3. शारीरिक बनावट की भिन्नता: छिपकली की त्वचा, उसकी आंखों की बनावट और रेंगने का तरीका इंसानी रीढ़ में एक अजीब सी सिहरन पैदा करता है। हालांकि यह सांप या मकड़ी के डर जितना सार्वभौमिक नहीं है, लेकिन इसके जैविक और मानसिक कारण पूरी तरह से प्रमाणित हैं।

Share The News
[youtube_shorts]

Popular News

raipur-gold-shop-robbery-arrest:लक्ष्य ज्वेलर्स चोरी केस: डॉग स्क्वॉड की मदद से पुलिस ने दबोचे आरोपी

raipur-gold-shop-robbery-arrest: राजधानी रायपुर के शंकर नगर स्थित लक्ष्य ज्वेलर्स...

CG Transfer Breaking : वाणिज्यिक कर विभाग में बड़ा फेरबदल, 21 कर्मचारियों का तबादला

CG Transfer Breaking :रायपुर। राज्य शासन के वाणिज्यिक कर...

Raipur Police Commissioner: IPS डॉ. संजीव शुक्ला ने संभाला पुलिस आयुक्त का पदभार… जानिए क्या कुछ कहा

Raipur Police Commissioner:रायपुर : रायपुर पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के...

Related Articles

Popular Categories