Sawan Last Monday 2026: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क– सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए खास माना जाता है। इस बार सावन का आखिरी सोमवार और पुत्रदा एकादशी का संयोग 24 अगस्त 2026 को बन रहा है। सोमवार को भगवान शिव की पूजा की जाती है, जबकि पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है।सावन का आखिरी सोमवार और एकादशी एक साथ होने से इस दिन शिव और विष्णु दोनों की पूजा का विशेष महत्व माना जा रहा है। हालांकि, व्रत की तिथि को लेकर गृहस्थ और वैष्णव परंपरा में अंतर है।
एकादशी पर दीपदान क्यों खास?
पुत्रदा एकादशी पर व्रत, भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और दान के साथ दीपदान करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा से दीपक जलाने से घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।सावन सोमवार दीपदान के साथ अगर आप पुत्रदा एकादशी की पूजा कर रहे हैं, तो कुछ खास जगहों पर दीपक जला सकते हैं। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इनका उद्देश्य आस्था से जुड़ा है।
1. तुलसी के पौधे के पास जलाएं दीपक
पुत्रदा एकादशी की शाम तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना शुभ माना जाता है। सबसे पहले तुलसी को जल अर्पित करके पूजा करें। इसके बाद घी का दीपक पौधे से थोड़ी दूरी पर रखें।सावन का आखिरी सोमवार पूजा के दिन तुलसी के पास दीपक जलाते समय भगवान विष्णु का ध्यान किया जा सकता है और उनके नाम का जाप किया जा सकता है।ध्यान रखें कि दीपक को तुलसी की पत्तियों के बहुत पास न रखें। गर्मी से पौधे को नुकसान हो सकता है।
2. भगवान विष्णु के मंदिर में करें दीपदान
पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। इसलिए इस दिन विष्णु मंदिर में दीपदान करने की भी धार्मिक मान्यता है। शाम की पूजा के बाद भगवान विष्णु के सामने घी या तेल का दीपक जलाया जा सकता है।Putrada Ekadashi Deep Dan के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करने की भी परंपरा है।
3. पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं दीपक
धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। शाम के समय पीपल के पास दीपक रखकर भगवान का ध्यान किया जा सकता है।सावन सोमवार धार्मिक उपाय करते समय सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। अगर पेड़ के आसपास सूखी पत्तियां या कोई ज्वलनशील सामान है, तो वहां दीपक नहीं जलाना चाहिए।
Read More: Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण का साया, फिर भी दिनभर बांध सकेंगे राखी! जानें शुभ समय
4. घर के पूजा स्थल पर करें दीपदान
अगर किसी कारण मंदिर जाना संभव नहीं है, तो घर के पूजा स्थल पर भी दीपक जलाया जा सकता है। भगवान विष्णु की पूजा के बाद घी का दीपक जलाएं और कुछ समय तक विष्णु मंत्र का जाप करें।Sawan Somwar Puja के दिन धार्मिक मान्यता में दीपक की संख्या से ज्यादा श्रद्धा को महत्व दिया जाता है। इसलिए अपनी सुविधा के अनुसार पूजा और दीपदान किया जा सकता है।
किस समय जलाएं दीपक?
दीपदान के लिए शाम का समय शुभ माना जाता है। सूर्यास्त के आसपास या उसके बाद दीपक जलाया जा सकता है। हालांकि, सूर्यास्त का समय हर शहर में अलग होता है।सावन का आखिरी सोमवार 2026 पर दीपदान करने वाले श्रद्धालुओं को अपने शहर के स्थानीय पंचांग में दिए गए सूर्यास्त के समय को देखना बेहतर रहेगा।
पुत्रदा एकादशी का क्या महत्व है?
‘पुत्रदा’ शब्द का अर्थ संतान प्रदान करने वाला माना जाता है। धार्मिक परंपरा में इस व्रत को संतान सुख, संतान की मंगलकामना और परिवार की खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है।इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत कथा सुनने और मंत्र जाप करने की परंपरा है। राजा महीजित से जुड़ी पुत्रदा एकादशी की कथा भी इस व्रत के महत्व से जुड़ी हुई है।
व्रत की तिथि को लेकर क्यों है अंतर?
गृहस्थ परंपरा के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जा रहा है और 24 अगस्त को द्वादशी तिथि में पारण किया जाएगा। नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार 24 अगस्त को दोपहर करीब 1:41 बजे से शाम 4:16 बजे तक पारण का समय बताया गया है।वहीं वैष्णव परंपरा में पुत्रदा एकादशी का व्रत 24 अगस्त को माना जा रहा है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि का पालन करना चाहिए।जरूरी सूचना: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारी पर आधारित है। इसके परिणामों की पुष्टि नहीं की जाती है।





