सरगुजा : छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य सरगुजा जिले में आदिवासी बालक आश्रम की स्थिति चिंताजनक सामने आई है। लखनपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत तुनगुरी में स्थित आश्रम में बच्चों को सोने के लिए गद्दे और बेडशीट की इतनी घटिया सुविधा दी गई है कि फटे गद्दों और गंदे बेडशीट में बच्चे कड़ाके की ठंड में भी सोने को मजबूर हैं।
ठंड में फटे गद्दों पर बच्चों की नींद
आश्रम में उपलब्ध पुराने गद्दों में रुई या फोम की जगह नारियल के रेशे भरे गए हैं, जिससे बच्चों को पर्याप्त गर्मी नहीं मिल रही। सरकार के शीतकालीन अवकाश के बाद भी कई बच्चे पर्याप्त गर्म कपड़े और टाट पट्टी न होने के कारण आश्रम लौटने में हिचकिचा रहे हैं।
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हर साल 50 करोड़ से ज्यादा खर्च, लेकिन सुविधाएं जर्जर
आश्रम में हर साल लगभग 50 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन गद्दे, बेडशीट और क्लासरूम की टाट पट्टी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी ठीक से नहीं हैं। बच्चों को पढ़ाई के लिए फर्श पर फटी टाट पट्टी पर बैठना पड़ता है, जो ठंड और असुविधा को बढ़ाता है।
जिम्मेदारों की लापरवाही
आश्रम अधीक्षक ने कई पत्र लिखकर सुधार की मांग की, लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विस्तार न्यूज़ की टीम ने आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ललित शुक्ला से संपर्क किया, जिन्होंने सुधार का भरोसा दिलाया और नए गद्दे जल्द पहुंचाने का आश्वासन दिया।
बच्चों के भविष्य पर सवाल
सरगुजा के इस आश्रम की स्थिति प्रशासन की लापरवाही और भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गई है। ऐसे हालात में बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ सकता है।











