Sai Diagnostic Center Controversy : सिंगरौली (02 मार्च 2026): मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में निजी स्वास्थ्य केंद्रों की मनमानी चरम पर है। ताजा मामला शहर के साईं डायग्नोस्टिक सेंटर का है, जहाँ मरीजों और उनके परिजनों ने संचालक पर अवैध वसूली और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के गंभीर आरोप लगाए हैं। चर्चा तो यहाँ तक है कि सेंटर द्वारा पूर्व में कई मरीजों को गलत रिपोर्ट थमा दी गई, जिससे उनके उपचार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
अल्ट्रासाउंड के नाम पर ₹1200 की वसूली मरीजों का आरोप है कि सेंटर में सरकार द्वारा निर्धारित दरों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। एक पीड़ित मरीज ने बताया कि जिस अल्ट्रासाउंड की सामान्य फीस ₹600 से ₹800 के बीच होनी चाहिए, उसके लिए सेंटर संचालक ₹1200 वसूल रहे हैं। सेंटर के भीतर कोई भी रेट लिस्ट प्रदर्शित नहीं की गई है, जिससे विशेषकर ग्रामीण और गरीब तबके के मरीजों को अपनी जमा-पूंजी मजबूरी में यहाँ गंवानी पड़ रही है।
अशिक्षित कर्मचारी और ‘वार्ड बॉय’ से जांच का आरोप सबसे चौंकाने वाला आरोप सेंटर की तकनीकी टीम पर लगा है। सूत्रों का दावा है कि सेंटर में नियमित रेडिओलॉजिस्ट (Radiologist) मौजूद नहीं रहते। आरोप है कि वार्ड बॉय स्तर के अनुभवहीन कर्मचारी ही अल्ट्रासाउंड मशीन संचालित कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कंप्यूटर ऑपरेटरों पर भी अक्षम होने के आरोप लगे हैं, जिन्हें मरीजों के नाम तक दर्ज करने का सलीका नहीं है। कम वेतन में अप्रशिक्षित स्टाफ रखकर मरीजों की जान जोखिम में डाली जा रही है।
सड़क पर खड़े मरीज और बदहाल पार्किंग बुनियादी सुविधाओं के नाम पर सेंटर की स्थिति दयनीय है। मरीजों के बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को घंटों सड़क किनारे खड़ा रहना पड़ता है। बेतरतीब पार्किंग की वजह से मुख्य सड़क पर यातायात बाधित हो रहा है, जिससे स्थानीय नागरिक भी परेशान हैं।
होली के बाद जांच का आश्वासन इस पूरे मामले में जिला स्वास्थ्य अधिकारी पुष्पराज सिंह का रुख टालमटोल वाला नजर आ रहा है। जब उनसे इन शिकायतों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि “मामला संज्ञान में आया है, इसकी जांच होली के बाद कराई जाएगी।” अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन त्योहार का इंतजार कर रहा है जबकि मरीजों की जान और जेब पर खतरा हर दिन मंडरा रहा है?











