नई दिल्ली। भारत को एक बार फिर से दुनिया के दो बड़े रक्षा साझेदार–रूस और फ्रांस–से आकर्षक प्रस्ताव मिले हैं। रूस ने अपने Su-57E स्टील्थ फाइटर जेट का बड़ा और सस्ता ऑफर रखा है, जबकि फ्रांस ने राफेल F4 विमान और तेजस Mk-2 के लिए साफ्रान M88-4 इंजन पैकेज की पेशकश की है। दोनों प्रस्ताव न केवल भारतीय वायुसेना के MRFA (मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट) टेंडर बल्कि स्वदेशी विमानन कार्यक्रमों को भी प्रभावित करेंगे।
रूस का Su-57E ऑफर: 5th जनरेशन का लो-बजट विकल्प
- संख्या और कीमत: रूस ने 60 से बढ़ाकर 126 Su-57E विमानों का ऑफर दिया है। प्रति विमान लागत करीब 670 करोड़ रुपये (80 मिलियन डॉलर) होगी।
- तकनीक ट्रांसफर: रूस ने 70-80% लोकलाइजेशन, HAL नासिक में उत्पादन, पूरा सोर्स कोड और भारतीय हथियारों (अस्त्र, रुद्रम) के इंटीग्रेशन की गारंटी दी है।
- क्षमताएं:
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- 5th जनरेशन स्टील्थ डिजाइन
- इंटरनल वेपन बे, ओपन आर्किटेक्चर
- सुपरमैन्यूवरेबिलिटी, मैक 2 की स्पीड
- 3,500 किमी की रेंज, 10 टन पेलोड
- फायदे:
- Su-30MKI से कम्पैटिबल
- अपग्रेड्स मुफ्त
- निर्यात अधिकार मिलने की संभावना
- कमियां:
- स्टील्थ क्षमता F-35 से कम (RCS 0.1-1 m² बनाम 0.001 m²)
- इंजन AL-41F1S अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं
- यूक्रेन युद्ध के कारण डिलीवरी पर संदेह
- विशेषज्ञों के अनुसार, Su-57 अभी “4++ जनरेशन” जैसा
फ्रांस का पैकेज: राफेल F4 और साफ्रान M88-4 इंजन
- राफेल F4:
- 114 विमानों का प्रस्ताव (सरकार-से-सरकार डील)
- कीमत: करीब 1,000 करोड़ रुपये प्रति विमान (120 मिलियन डॉलर)
- 60% लोकलाइजेशन, लेकिन अपग्रेड्स महंगे
- साबित युद्धक क्षमता: राफेल पहले ही ऑपरेशन सिंदूर (2025) और 2020 के बाद की कई तैनातियों में सफल साबित हुआ
- तेजस Mk-2 के लिए साफ्रान M88-4 इंजन:
- GE F414 (98 kN थ्रस्ट) का विकल्प
- M88-4 थ्रस्ट 95–105 kN तक
- डिजाइन बदलाव न्यूनतम, ‘प्लग-एंड-प्ले’
- भविष्य में AMCA के 120 kN इंजन के लिए सहयोग की संभावना
- फायदे:
- विश्वसनीय और सिद्ध तकनीक
- फ्रांस के साथ मजबूत रक्षा संबंध
- निर्यात बाजार में अवसर
- कमियां:
- प्रति विमान लागत अधिक
- अपग्रेड महंगे और 100% ToT नहीं
- M88-4 के विकास में 2-3 साल की देरी संभव
भारत पर असर: किसे चुनेगा रक्षा मंत्रालय?
- Su-57E: भारत को अपेक्षाकृत सस्ते दाम में 5th जनरेशन लड़ाकू जेट मिल सकते हैं। लेकिन रूस की डिलीवरी क्षमता और तकनीकी खामियों पर सवाल हैं।
- राफेल F4 + M88-4: यह पैकेज महंगा जरूर है, लेकिन विश्वसनीय और दीर्घकालिक साझेदारी सुनिश्चित करता है। साथ ही, M88-4 इंजन से तेजस Mk-2 और भविष्य के AMCA प्रोग्राम को मजबूती मिलेगी।
रूस का ऑफर भारत को अधिक संख्या में और सस्ते विमानों की ओर आकर्षित करता है, जबकि फ्रांस का पैकेज भरोसे और निर्यात की संभावना बढ़ाता है। विश्लेषकों का मानना है कि तत्कालिक जरूरतों के लिए राफेल और दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता के लिए साफ्रान इंजन भारत के लिए ज्यादा लाभकारी हो सकते हैं।













