Rupee vs Dollar 2026 : नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक पोस्ट के जरिए गिरते रुपए और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर आम जनता को आगाह किया है। उन्होंने कहा कि सरकार भले ही इसे ‘सामान्य’ बताए, लेकिन इसका गहरा असर हर भारतीय परिवार की जेब पर पड़ना तय है।
रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 100 की तरफ बढ़ना और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी – ये सिर्फ आंकड़े नहीं, आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं।
सरकार चाहे इसे “नॉर्मल” बताए, लेकिन हकीकत ये है:
• उत्पादन और ट्रांसपोर्ट महंगे होंगे
• MSMEs को सबसे ज्यादा चोट…— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) March 21, 2026
राहुल गांधी की मुख्य चिंताएं:
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महंगाई का चक्र: राहुल ने चेतावनी दी कि इंडस्ट्रियल फ्यूल महंगा होने से उत्पादन और ट्रांसपोर्टेशन (परिवहन) की लागत बढ़ेगी, जिससे रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छुएंगे।
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MSME पर चोट: छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए लागत बढ़ना उनके अस्तित्व के लिए खतरा साबित होगा।
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शेयर बाजार पर दबाव: रुपए की कमजोरी (93.53 प्रति डॉलर) के कारण विदेशी निवेशक (FII) अपना पैसा बाहर निकालेंगे, जिससे शेयर बाजार टूटेगा।
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बड़ा सवाल: राहुल ने तंज कसते हुए पूछा, “सवाल यह नहीं कि सरकार क्या कह रही है, सवाल यह है कि आपकी थाली में क्या बचा है।”
20 मार्च: प्रीमियम पेट्रोल और इंडस्ट्रियल फ्यूल में ‘आग’
सरकारी तेल कंपनियों ने सामान्य पेट्रोल की कीमतों को स्थिर रखा है, लेकिन प्रीमियम पेट्रोल और औद्योगिक डीजल में भारी बढ़ोतरी की है:
प्रीमियम पेट्रोल (Speed, Power, XP95)
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बढ़ोतरी: ₹2.09 से ₹2.35 प्रति लीटर तक।
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भोपाल का हाल: मध्य प्रदेश की राजधानी में प्रीमियम पेट्रोल की कीमत ₹117 के करीब पहुँच गई है। यह सामान्य पेट्रोल से करीब ₹10-12 महंगा बिक रहा है।
इंडस्ट्रियल फ्यूल (औद्योगिक डीजल)
इंडियन ऑयल (IOCL) ने इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में 25% का भारी उछाल किया है।
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पुरानी कीमत: ₹87.67 प्रति लीटर
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नई कीमत: ₹109.59 प्रति लीटर
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असर: इसकी सीधी मार रेलवे, रोडवेज बसों, बड़ी फैक्ट्रियों, अस्पतालों और मॉल्स पर पड़ेगी, जो सीधे टैंकरों से थोक में डीजल खरीदते हैं।
रुपया अपने सबसे निचले स्तर पर: 93.53 का रिकॉर्ड लो
विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 64 पैसे टूटकर 93.53 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि:
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भू-राजनीतिक तनाव: वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध और अस्थिरता।
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कच्चा तेल (Crude Oil): कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने घरेलू मुद्रा पर दबाव बढ़ा दिया है।











