Rewa Sanjay Gandhi Hospital Fire : रीवा (विकास बघेल)। विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान, संभागीय संजय गांधी अस्पताल में शुक्रवार दोपहर एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। अस्पताल के तीसरे तल पर स्थित मेडिसिन डिपार्टमेंट के आईसीयू (ICU) में शॉर्ट सर्किट के कारण अचानक आग लग गई। देखते ही देखते वार्ड में लगे सभी मॉनिटर्स से धुआं निकलने लगा और फायर अलार्म की गूंज से पूरे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
ऑक्सीजन सप्लाई बंद, वैकल्पिक व्यवस्था से बची जान
आगजनी की इस घटना में आईसीयू का मुख्य ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम पूरी तरह ठप हो गया, जिससे वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखे गए मरीजों की जान संकट में आ गई। आनन-फानन में मौके पर पहुंचे सुरक्षाकर्मियों और फायर सेफ्टी टीम ने मोर्चा संभाला। वार्ड में भर्ती मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और उन्हें कृत्रिम ऑक्सीजन (Ambu Bag/Cylinder) की वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान की गई।
प्रबंधन की लापरवाही: “हादसे के बाद भी बेखबर रहे जिम्मेदार”
अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि घटना के काफी देर बाद तक जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी सूचना तक नहीं थी। अस्पताल के सीएमओ डॉ. संतोष सिंह ने मीडिया को दिए बयान में कहा, “आपके माध्यम से यह घटना संज्ञान में आई है, अभी मैं मौके पर नहीं पहुंचा हूं। वहां जाने के बाद ही वस्तु स्थिति स्पष्ट कर पाऊंगा।” अधिकारियों का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया चर्चा का विषय बना हुआ है।
पुरानी घटनाओं से नहीं लिया सबक
संजय गांधी अस्पताल में आगजनी की यह कोई पहली घटना नहीं है।
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पिछला हादसा: कुछ महीने पूर्व गायनिक विभाग के ओटी (OT) में भीषण आग लगी थी, जिसमें एक प्रसूता और उसके नवजात का शव झुलस गया था।
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जांच का दिखावा: पिछली घटना के बाद भी प्रबंधन ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया था, लेकिन धरातल पर सुरक्षा मानकों में कोई सुधार नहीं दिखा। आज की घटना ने साबित कर दिया है कि अस्पताल का फायर सेफ्टी सिस्टम और इलेक्ट्रिकल ऑडिट केवल कागजों तक सीमित है।











