निशानेबाज न्यूज़ डेस्क (रीवा): मध्यप्रदेश के रीवा शहर में एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के प्रमुख इलाके कला मंदिर के सामने स्थित एक कीमती जमीन पर निर्माण को लेकर नगर निगम और पूर्व राजघराने के बीच विवाद गहरा गया है।
हाईकोर्ट स्टे के बावजूद शुरू हुआ निर्माण
जानकारी के मुताबिक, संबंधित जमीन पर उच्च न्यायालय द्वारा पहले से ही स्टे आदेश जारी किया गया है। इसके बावजूद नगर निगम द्वारा यहां दूध व्यापारियों के लिए टीन शेड निर्माण का काम शुरू करा दिया गया। जैसे ही इस निर्माण की जानकारी पूर्व राजपरिवार के सदस्य महाराजा पुष्पराज सिंह को मिली, उन्होंने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए काम रुकवा दिया।
महाराजा ने दिखाई कानूनी दस्तावेज
महाराजा पुष्पराज सिंह का कहना है कि यह जमीन उनकी निजी संपत्ति है और इस पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य न्यायालय के आदेश के तहत प्रतिबंधित है। उन्होंने नगर निगम अधिकारियों और अमहिया थाना पुलिस को मौके पर बुलाकर हाईकोर्ट के स्टे से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए।
ठेकेदार ने दी सफाई
वहीं, निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार अमित थापर ने अपनी सफाई में कहा कि उन्हें नगर निगम से विधिवत वर्क ऑर्डर मिला था और वे उसी के आधार पर काम कर रहे थे। उनका दावा है कि उन्हें किसी स्टे आदेश की जानकारी नहीं दी गई थी।
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पुलिस हस्तक्षेप के बाद काम पर रोक
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच की। इसके बाद फिलहाल निर्माण कार्य को पूरी तरह से रोक दिया गया है।
निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद वर्क ऑर्डर जारी होना प्रशासनिक लापरवाही या समन्वय की कमी को दर्शाता है।
फिलहाल मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।











