भोपाल : रीवा के शिक्षा विभाग में लंबे समय से अनियमितताओं का सिलसिला जारी है। विभाग के कुछ प्रभावशाली अधिकारी और कर्मचारी नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। फर्जी दस्तावेज तैयार करना, रात के समय दबे-छिपे ज्वाइनिंग कराना और ऑनलाइन पोर्टल के नियमों की अवहेलना करना आम बातें बन चुकी हैं। ये घटनाएं शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
अतिथि शिक्षिका सिमरन बानो का वेतन और हक रुका
शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय डोल, संकुल पड़री की अतिथि शिक्षिका सिमरन बानो ने बताया कि उनकी ऑनलाइन ज्वाइनिंग 22 अगस्त 2025 को हुई थी, लेकिन आज तक उन्हें वेतन नहीं मिला। हेडमास्टर नियमित रूप से उनकी उपस्थिति प्राचार्य को भेजते रहे, लेकिन प्रशासनिक बहानों के कारण उसे मान्यता नहीं दी गई।
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सिमरन ने यह भी आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक होने की वजह से उनके साथ पक्षपात और दुर्व्यवहार किया जा रहा है। पहले जिस शिक्षक की ऑफलाइन ज्वाइनिंग कराई गई थी, वह निजी संबंधों के आधार पर स्कूल में बनी रही।
दस्तावेजों में हेरफेर और पक्षपात
सिमरन के अनुसार, 25 नवंबर 2025 को बीईओ ने अचानक एक अन्य अतिथि शिक्षक को स्कूल लेकर आए और उसकी ऑफलाइन ज्वाइनिंग करवाई। इसके बाद अक्टूबर महीने की पूरी उपस्थिति एक ही दिन में रजिस्टर में दर्ज की गई। इससे साफ हो गया कि दस्तावेजों में हेरफेर और पक्षपात खुलेआम हो रहा है।
शिकायत और कार्रवाई की मांग
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सिमरन बानो ने इस मामले की शिकायत जनसुनवाई में कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को दी। अधिकारी ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन इससे पहले भी कई बार ऐसे आश्वासन के बावजूद मामला लटका दिया गया। पीड़िता का कहना है कि आरोपी अधिकारी लगातार बचाए जा रहे हैं, जिससे उसका भविष्य अधर में लटका हुआ है।
शिक्षा विभाग में पारदर्शिता की आवश्यकता
ऐसे में अब रीवा शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और न्याय की कमी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। अतिथि शिक्षकों के हक और विद्यार्थियों की शिक्षा पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उच्च स्तरीय प्रशासनिक और न्यायिक हस्तक्षेप ही इस स्थिति को सुधार सकता है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित कर सकता है।













