Friday, September 25, 2026
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‘नीच’ बोलने भर से लागू नहीं होगा SC-ST एक्ट, राजस्थान हाई कोर्ट का ख़ास फैसला

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : राजस्थान हाई कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को ‘नीच’ जैसे अपमानजनक शब्द कह देने मात्र से यह कानून स्वतः लागू नहीं हो जाता। अदालत ने कहा कि इस एक्ट के तहत अपराध तभी माना जाएगा जब अपमान सीधे तौर पर जाति के आधार पर किया गया हो और इसके ठोस प्रमाण मौजूद हों।

2011 के विवाद से जुड़ा मामला

यह मामला वर्ष 2011 का है, जब आईआईटी जोधपुर में अतिक्रमण की जांच के दौरान कुछ लोगों और सरकारी अधिकारियों के बीच विवाद हो गया था। आरोप था कि विरोध कर रहे लोगों ने अधिकारी को ‘नीच’ कहकर संबोधित किया, जिसके बाद इसे जातिगत अपमान मानते हुए एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। सभी आरोपी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का विरोध कर रहे थे।

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आरोपियों की दलील

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपियों ने तर्क दिया कि उन्हें संबंधित अधिकारी की जाति के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उनके अनुसार, घटना के दौरान सामान्य कहासुनी हुई थी और इस्तेमाल किया गया शब्द किसी विशेष जाति की ओर संकेत नहीं करता। साथ ही, मौके पर कोई स्वतंत्र गवाह भी मौजूद नहीं था, जिससे आरोपों की पुष्टि हो सके।

ठोस सबूत के अभाव में राहत

अदालत ने पाया कि विवाद के दौरान बोले गए शब्दों से किसी जाति विशेष का संकेत नहीं मिलता और न ही यह साबित हुआ कि आरोपियों को अधिकारी की जाति की जानकारी थी। इसलिए एससी-एसटी एक्ट लगाने के लिए आवश्यक कानूनी आधार मौजूद नहीं था। हाई कोर्ट ने एससी-एसटी से जुड़े आरोपों को निरस्त कर दिया।

अन्य धाराओं में कार्रवाई जारी

हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी कार्य में बाधा डालने और अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की से जुड़े आरोपों पर मुकदमा चलता रहेगा। इस फैसले को एससी-एसटी एक्ट की व्याख्या के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अदालत ने कानून के उपयोग के लिए प्रमाणिकता और मंशा दोनों को आवश्यक बताया है।

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