Politics News : AI वीडियो से गरमाई सियासत: भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कांग्रेस ने बताया फर्जी प्रचार

Sanjay Sahu
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Politics News : रायपुर : रायपुर में छत्तीसगढ़ की राजनीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक नया हथियार बनकर उभरा है। भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ तीन AI जनरेटेड वीडियो जारी किए हैं, जिनमें कांग्रेस नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जवाब में कांग्रेस ने इन वीडियो को फर्जी बताते हुए भाजपा पर पलटवार किया है।

 

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Politics News : एक वीडियो में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों की चर्चा करते हुए उन पर आपराधिक मामलों का जिक्र किया गया है। वीडियो के एक दृश्य में कहा गया कि भिलाई से देवेंद्र यादव को जिलाध्यक्ष बना देते हैं, जिस पर जवाब आता है कि उनके खिलाफ बलौदाबाजार में आगजनी का केस दर्ज है। इसके बाद विकास तिवारी के नाम पर चर्चा होती है और कहा जाता है कि उन पर गाली-गलौज का आरोप है। रायपुर के आसिफ मेमन का नाम भी वीडियो में सामने आता है।

Politics News : दूसरे वीडियो में कांग्रेस पर आदिवासी नेताओं के अपमान का आरोप लगाया गया है। तीसरे वीडियो में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को असम और बिहार चुनाव में कांग्रेस की जीत का सपना देखते हुए दिखाया गया है।

भाजपा प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने इन वीडियो को सही ठहराते हुए कहा कि कांग्रेस जैसा है, वही AI में दिख रहा है। वहीं, भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस में चोर-डकैत भरे हैं, ऐसे लोग ही उनके संगठन की पहचान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जांजगीर में NSUI का जिलाध्यक्ष डकैती की योजना बनाते हुए पकड़ा गया, यही कांग्रेस की वास्तविकता है।

कांग्रेस ने इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए फर्जी वीडियो और झूठे प्रचार में लगी है। उन्होंने कहा कि भाजपा असली समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की हरकतें कर रही है।

Politics News : गौरतलब है कि इससे पहले कांग्रेस भी बिजली बिल के मुद्दे पर AI वीडियो बनाकर भाजपा सरकार को घेर चुकी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में AI प्रचार का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है, लेकिन इसके साथ नैतिक जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार का कहना है कि जब तक नैतिकता बनी रहती है, तब तक यह माध्यम खतरनाक नहीं है, लेकिन बिना नियंत्रण के इसका दुरुपयोग लोकतांत्रिक बहस को नुकसान पहुंचा सकता है।

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