Pitra Dosh : नई दिल्ली: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृदोष एक ऐसा श्राप है जिसका प्रभाव केवल एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह कई पीढ़ियों तक पीछा कर सकता है। जब पूर्वजों की आत्माएं असंतुष्ट रह जाती हैं, या उनकी मृत्यु के बाद श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्मकांड ठीक से नहीं किए जाते, तो माना जाता है कि परिवार पर पितृदोष लग जाता है।
Pitra Dosh : कितनी पीढ़ियों तक चलता है पितृदोष? गरुड़ पुराण के अनुसार, पितृदोष का प्रभाव तीन से सात पीढ़ियों तक रह सकता है। सामान्य तौर पर, इसका असर तीन पीढ़ियों (पिता, दादा और परदादा) तक देखा जाता है। हालांकि, कुछ मान्यताओं के अनुसार, अगर पितृदोष बहुत गहरा हो तो यह सात पीढ़ियों तक भी बना रह सकता है, जिससे परिवार के सदस्यों को लगातार चुनौतियों और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
क्यों लगता है पितृदोष? पितृदोष का सबसे प्रमुख कारण पूर्वजों का श्राद्ध, पिंडदान या तर्पण न करना माना जाता है। जब कोई व्यक्ति अपने पूर्वजों के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता, तो उनकी आत्माएं शांति नहीं पातीं और इसका बुरा प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर पड़ सकता है।
पितृदोष से बचने के उपाय इस दोष से मुक्ति पाने और इसके प्रभाव को कम करने के लिए, श्राद्ध पक्ष के दौरान अपने पितरों का श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण अवश्य करना चाहिए। इसके अलावा, अपने कर्मों को शुद्ध रखना और मन में किसी के लिए बुरा भाव न रखना भी पितृदोष के प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है।









