Sunday, August 16, 2026
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Mahakaleshwar Bhasma Aarti : महाकाल की भस्म आरती में गूंजा उज्जैन, हर-हर महादेव के जयकारे

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उज्जैन: विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में तड़के ब्रह्म मुहूर्त में भव्य भस्म आरती वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। सुबह लगभग चार बजे जैसे ही गर्भगृह के पट खुले, “हर-हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से आए श्रद्धालुओं ने इस पावन क्षण का साक्षात दर्शन कर गहन आध्यात्मिक अनुभूति की।

पंचामृत अभिषेक से आरंभ हुआ अनुष्ठान

भस्म आरती की शुरुआत पारंपरिक पंचामृत अभिषेक से हुई। भगवान महाकाल का जल, दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से विधिपूर्वक स्नान कराया गया। इसके बाद रुद्रपाठ, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण दिव्यता से भर गया। भक्त मंत्र-जप और ध्यान में लीन होकर इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने।

भस्म श्रृंगार का गूढ़ आध्यात्मिक संदेश

अभिषेक के पश्चात भगवान महाकाल का भस्म से विशेष श्रृंगार किया गया। सनातन परंपरा में भस्म को जीवन की क्षणभंगुरता और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा यह संदेश देती है कि सांसारिक मोह-माया नश्वर है, जबकि ईश्वर भक्ति और आत्मचिंतन ही शाश्वत सत्य है। इस भावपूर्ण क्षण को देखकर कई श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

साधना, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संगम

पूरे अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर साधना, शांति और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर रहा। धार्मिक मान्यता है कि महाकाल की भस्म आरती के दर्शन से मानसिक शांति, आत्मिक शुद्धि और सकारात्मक शक्ति की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचकर इस अद्वितीय परंपरा का हिस्सा बनते हैं।

वैश्विक आस्था का प्रमुख केंद्र

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवंत पहचान है। उज्जैन स्थित यह ज्योतिर्लिंग विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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