दुर्ग [Nishanebaaz News]Durg Chhatagarh Hanuman Temple Gold Treasure Legend। ‘छत्तीसगढ़’ प्रदेश के नामकरण के पीछे 36 गढ़ों (किलों) का ऐतिहासिक संदर्भ जुड़ा हुआ है। इन्हीं 36 ऐतिहासिक गढ़ों में से एक प्रमुख गढ़ है— ‘छातागढ़’। दुर्ग जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थान लगभग 5000 वर्ष पुराना माना जाता है। शिवनाथ नदी के किनारे हरी-भरी पहाड़ियों और प्राकृतिक छटा के बीच बसे इस स्थल को लेकर कई पौराणिक और रहस्यमयी मान्यताएं प्रचलित हैं। यहां की मुख्य पहाड़ी पर करीब ढाई हजार साल पुरानी भगवान बजरंगबली की एक अतिप्राचीन पत्थर की प्रतिमा स्थापित है।
स्थानीय जनश्रुतियों और लोकमान्यता के अनुसार, इस मंदिर परिसर और हनुमान जी की मूर्ति के ठीक नीचे अपरंपार सोने का खजाना दफन है, जिसकी सुरक्षा सदियों से इच्छाधारी नाग-नागिन का एक जोड़ा कर रहा है।
राजा जगतपाल की सुरंग और 100 सीढ़ियों का सफर इतिहासकारों और स्थानीय बुजुर्गों की मानें तो दुर्ग के तत्कालीन राजा जगतपाल अपने दुर्ग स्थित राजमहल से एक गुप्त सुरंग (गुफा) के जरिए छातागढ़ मंदिर पहुंचते थे। वे रोजाना इसी मार्ग से आकर भगवान बजरंगबली की पूजा-अर्चना करते थे और अपने गुरु से परामर्श लेकर वापस लौट जाते थे।
वर्तमान में पहाड़ी के छोटे से टीले पर स्थित इस पावन मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 100 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। शिवनाथ नदी के तट पर स्थित होने के कारण यह पूरा इलाका प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक शांति से भरा हुआ है।
अमरकंटक के संत को आया था खजाने का सपना मंदिर के पुजारी सोन सिंह राजपूत ने बताया कि अमरकंटक से छातागढ़ पहुंचे पूज्य बाबा कानू चरण जी को इस स्थान पर विशाल खजाना दफन होने का स्वप्न आया था। स्वप्न में बाबा को खजाने की रखवाली करता हुआ एक अलौकिक नाग-नागिन का जोड़ा भी दिखाई दिया था।
इसके अलावा यह भी माना जाता है कि मंदिर के तलघर के नीचे मां दुर्गा की शुद्ध सोने की प्रतिमा भी स्थापित है। वर्ष 2018 में राजस्थान से आए एक साधु ने भी इस स्थान पर नाग-नागिन के जोड़े के प्रत्यक्ष दर्शन करने का दावा किया था, जिसके बाद यहां खजाना होने की जनमान्यता को और बल मिला।
आज भी विचरण करता है नाग-नागिन का जोड़ा, प्रांगण में लगे हैं चेतावनी बोर्ड छातागढ़ के सबसे बुजुर्ग निवासी जयलाल यादव और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने खुद कई बार इस क्षेत्र में नाग-नागिन के जोड़े को घूमते हुए देखा है। यह जोड़ा पूरे इलाके में बिना किसी को नुकसान पहुंचाए विचरण करता रहता है।
सुरक्षा और सतर्कता के लिहाज से मंदिर प्रबंधन द्वारा पूरे प्रांगण में जगह-जगह नाग-नागिन की उपस्थिति की सूचना देने वाले बोर्ड लगाए गए हैं। हालांकि, इतना समृद्ध इतिहास और रहस्यमयी मान्यताएं होने के बावजूद अब तक पुरातत्व विभाग (Archaeological Department) की टीम इस स्थल के सर्वे और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए नहीं पहुंची है। स्थानीय लोग इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और शोध की मांग कर रहे हैं।





