Saturday, August 22, 2026
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CG: शर्मनाक! सिर्फ ₹1500 के लिए सास को कंधे पर लादकर 9 किमी पैदल भटकती बहू, सिस्टम पर उठे सवाल

Pension Struggle Story : पेंशन के लिए संघर्ष की एक ऐसी तस्वीर छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से सामने आई है, जिसने सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मैनपाट इलाके के कुनिया गांव में रहने वाली सुखमुनिया अपनी बुजुर्ग सास को पीठ पर लादकर 9 किलोमीटर पैदल चलीं, सिर्फ इसलिए ताकि उन्हें 1500 रुपये की पेंशन मिल सके।यह घटना अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

सुखमुनिया का यह सफर आसान नहीं था। पेंशन के लिए संघर्ष के दौरान उन्हें पहाड़ी रास्तों से गुजरना पड़ा और कई नाले भी पार करने पड़े। तेज गर्मी और कठिन रास्तों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।गांव के लोगों का कहना है कि हर महीने इसी तरह की परेशानी झेलकर परिवार पेंशन लेने पहुंचता है।

पेंशन के लिए संघर्ष की वजह से उठे सिस्टम पर सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। पेंशन के लिए संघर्ष की यह कहानी दिखाती है कि कई ग्रामीण इलाकों में आज भी योजनाओं का लाभ लोगों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा है।लोग पूछ रहे हैं कि जब सरकार डिजिटल और घर-घर योजना पहुंचाने की बात करती है, तो फिर बुजुर्गों को इतनी परेशानी क्यों झेलनी पड़ रही है।

पेंशन के लिए संघर्ष पर बहू ने बताई अपनी मजबूरी
सुखमुनिया ने बताया कि पहले पेंशन का पैसा गांव तक पहुंच जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। पेंशन के लिए संघर्ष के चलते उन्हें अपनी बुजुर्ग सास को खुद उठाकर ले जाना पड़ता है।उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारियों को इस परेशानी के बारे में बताया गया, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।
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पेंशन के लिए संघर्ष ने खोली सरकारी दावों की पोल
सरकारें अक्सर योजनाओं के प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च करती हैं, लेकिन पेंशन के लिए संघर्ष की यह तस्वीर उन दावों की असली सच्चाई दिखा रही है। गांव के लोग कहते हैं कि कागजों में योजनाएं सफल दिखाई जाती हैं, लेकिन जमीन पर हालात अलग हैं।लोगों का कहना है कि बुजुर्ग और गरीब परिवारों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।

पेंशन के लिए संघर्ष की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल
सुखमुनिया की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। पेंशन के लिए संघर्ष की इस कहानी को देखकर लोग भावुक हो रहे हैं और प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।कई लोगों ने इसे ग्रामीण इलाकों की सच्चाई बताते हुए व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई है।

पेंशन के लिए संघर्ष पर प्रशासन की चुप्पी
अब तक इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है। हालांकि पेंशन के लिए संघर्ष की खबर वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर हलचल जरूर बढ़ गई है।लोग उम्मीद कर रहे हैं कि अब अधिकारियों की नींद खुलेगी और गांव की बुजुर्ग महिलाओं को ऐसी परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी।

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