निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : यूरेशिया रिव्यू की हालिया रिपोर्ट ने बांग्लादेश के सामने एक गंभीर सुरक्षा चेतावनी रखी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान अपने निहित स्वार्थों के लिए बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए करने की कोशिश कर रहा है। मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता ने वहां कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों को दोबारा सक्रिय होने का अवसर दे दिया है, जो पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
भारत विरोधी एजेंडे का केंद्र बनता बांग्लादेश
रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद का मुख्य उद्देश्य बांग्लादेश की धरती को एक रणनीतिक लॉन्च पैड के रूप में इस्तेमाल करना है, ताकि भारत के खिलाफ अपने छद्म युद्ध को आगे बढ़ाया जा सके। पाकिस्तान को इस बात की परवाह नहीं है कि इससे बांग्लादेश में आतंकवाद, अस्थिरता और सामाजिक विभाजन कितना बढ़ सकता है।
ऑपरेशन सर्चलाइट की भयावह विरासत
रिपोर्ट 1971 के काले अध्याय की भी याद दिलाती है। 25 मार्च 1971 को शुरू हुआ ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ पाकिस्तानी सेना का एक क्रूर सैन्य अभियान था, जिसका उद्देश्य पूर्वी पाकिस्तान में स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलना था। बांग्लापीडिया और 1,450 से अधिक विद्वानों के अनुसार, यह अभियान लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने और आम नागरिकों पर अत्याचार का प्रतीक था।
Read More : यूरेशिया रिव्यू की चेतावनी: बांग्लादेश में बढ़ती पाकिस्तानी दखल से भारत विरोधी साजिश का खतरा
विदेशी मीडिया पर प्रतिबंध और जवाबदेही का अभाव
उस समय पाकिस्तानी सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में विदेशी मीडिया की एंट्री पूरी तरह रोक दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, मीडिया की अनुपस्थिति ने सेना को बिना किसी डर और जवाबदेही के अत्याचार करने का मौका दिया, जिससे निर्दोष नागरिकों पर अमानवीय हिंसा हुई।
जमात-ए-इस्लामी और कट्टरपंथी संगठनों की भूमिका
इस सैन्य कार्रवाई में जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी ताकतों ने पाकिस्तानी सेना का खुलकर साथ दिया। ईस्ट पाकिस्तान सेंट्रल पीस कमेटी के जरिए इन संगठनों ने 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान आम जनता के खिलाफ हिंसक कृत्यों को अंजाम दिया।
विफल इस्लामीकरण और जारी साजिश
रिपोर्ट बताती है कि तमाम क्रूरता के बावजूद पाकिस्तान बांग्लादेश को स्वतंत्र बनने से रोक नहीं सका। इसके बाद भी उसने वहां धार्मिक कट्टरता के जरिए प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें कभी बंद नहीं कीं, ताकि भारत के खिलाफ रणनीतिक लाभ लिया जा सके।
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
मौजूदा हालात का फायदा उठाकर पाकिस्तान कट्टरपंथी और आतंकी संगठनों को दोबारा संगठित करने में जुटा है। इसका सीधा खतरा भारत की आंतरिक और सीमा सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली को इस चुनौती से निपटने के लिए मजबूत, सक्रिय और दूरगामी रणनीति अपनानी होगी।
भविष्य के लिए स्पष्ट चेतावनी
यूरेशिया रिव्यू ने बांग्लादेश की आने वाली सरकारों को आगाह किया है कि वे अपने इतिहास से सबक लें और धार्मिक कट्टरता को किसी भी तरह का राजनीतिक संरक्षण न मिलने दें। रिपोर्ट साफ कहती है कि उग्रवाद को रोकना बेहद कठिन होता है और पाकिस्तान स्वयं इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।













