जम्मू, 7 सितंबर। जम्मू-कश्मीर की हजरतबल दरगाह से अशोक स्तंभ (राष्ट्रीय चिन्ह) हटाने का मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। पुलिस ने अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस घटना पर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने इसे मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताते हुए वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष और बीजेपी नेत्री डॉ. दरख्शां अंद्राबी पर कार्रवाई की मांग की है।
Read News : special cleaning campaign : गणेश विसर्जन के बाद जुहू बीच पर अक्षय कुमार और अमृता फडणवीस ने चलाया सफाई अभियान
इधर, दरख्शां अंद्राबी ने शिलापट्टी तोड़ने वालों को आतंकवादी करार दिया और कहा कि यह हमला केवल संपत्ति पर नहीं, बल्कि आस्था और संविधान पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब राजनीतिक साजिश के तहत किया गया। उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान समर्थित संगठन TRF (द रेजिस्टेंस फ्रंट) ने सोशल मीडिया पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी है।
अंद्राबी ने कहा, “अगर किसी को अशोक स्तंभ पर आपत्ति है, तो उन्हें प्रतीक चिह्न वाले नोट भी इस्तेमाल नहीं करने चाहिए। यह कृत्य किसी आतंकवादी से कम नहीं है। यह संविधान और दरगाह के दिल पर चोट है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस को पहले से चेतावनी दी गई थी।
Read News : Balod News : गणपति बप्पा का भव्य विसर्जन रेहची अर्जुंदा में उत्साह और भक्ति का संगम
मामले को लेकर बीजेपी ने अंद्राबी के रुख का समर्थन किया है, जबकि विपक्षी दलों का आरोप है कि दरगाह में राष्ट्रीय प्रतीक स्थापित कर धार्मिक भावनाएं भड़काई गईं। अंद्राबी ने पलटवार करते हुए कहा कि कुछ लोग इस मुद्दे पर सियासत कर रहे हैं और असली दोषियों को बचाने की कोशिश हो रही है।
गौरतलब है कि डॉ. दरख्शां अंद्राबी जम्मू-कश्मीर बीजेपी की कोर ग्रुप सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य और पार्टी प्रवक्ता हैं। वह मौजूदा समय में जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन भी हैं। उन्होंने गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर से उर्दू साहित्य में पीएचडी की है।











