Bastar IED Free 2026: जगदलपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक और अभूतपूर्व और बड़ी सफलता हाथ लगी है। नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में सुरक्षाबलों द्वारा चलाए गए 23 दिनों के सबसे लंबे और सघन अभियान (डी-माइनिंग ऑपरेशन) के दौरान रिकॉर्ड संख्या में आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बरामद किए गए हैं। इस विशेष सर्च ऑपरेशन की बदौलत नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों और ग्रामीणों को निशाना बनाने की एक बहुत बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया गया है। बस्तर रेंज पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के चलते अब बस्तर संभाग का लगभग 99 फीसदी इलाका आईईडी मुक्त हो चुका है।
5 महीने में 278 बारूदी सुरंगें की गईं निष्कासित
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 के शुरुआती पांच महीनों में ही सुरक्षाबलों ने बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों से कुल 278 खतरनाक आईईडी बरामद कर उन्हें सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज किया है। सुरक्षाबलों की इसी अचूक रणनीति और सतर्कता का परिणाम है कि इस पूरी अवधि में नक्सली सिर्फ 9 बारूदी विस्फोट करने में ही सफल हो पाए, जिससे कई संभावित बड़े हादसे टल गए। कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों का दुर्गम क्षेत्र लंबे समय से नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना रहा था, जहां उन्होंने सुरक्षाबलों की मूवमेंट को रोकने और ग्रामीणों में दहशत पैदा करने के लिए पगडंडियों और सड़कों के नीचे भारी मात्रा में कमांड और प्रेशर आईईडी प्लांट कर रखे थे।
मानसून में भी जारी रहेगा 1 फीसदी बचे इलाके में अभियान
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने इस बड़ी सफलता की जानकारी साझा करते हुए बताया कि माओवादियों द्वारा अतीत में छिपाकर रखे गए अधिकांश आईईडी को अत्याधुनिक तकनीकों, बम निरोधक दस्तों (BDDS) और नियमित रोड ओपनिंग पार्टियों (ROP) की मदद से खोज निकाला गया है। वर्तमान में केवल 1 फीसदी दुर्गम इलाका ही बचा है, जिसमें मुख्य रूप से अंतरराज्यीय सीमावर्ती क्षेत्र, जिला सीमाएं और घने जंगलों के बीच की पहाड़ियां शामिल हैं। आईजी ने स्पष्ट किया है कि आगामी मानसून के दौरान और उसके बाद भी यह डी-माइनिंग अभियान लगातार जारी रहेगा। अगले छह महीनों के भीतर बस्तर को पूरी तरह (100%) आईईडी मुक्त घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है।
बारूद हटने से बस्तर के गांवों में बढ़ा ग्रामीणों का भरोसा
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस बेहद जोखिम भरे अभियान की सफलता के पीछे स्थानीय ग्रामीणों का मिल रहा गोपनीय इनपुट और सहयोग सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। जिन अंदरूनी और संवेदनशील क्षेत्रों में कभी आईईडी और बारूदी सुरंगों के डर से लोग कदम रखने से भी कतराते थे, वहां अब भय का माहौल समाप्त हो रहा है। इलाकों के सुरक्षित होने से शासन की विकास योजनाएं तेजी से पहुंच रही हैं, जिससे बस्तर के सुदूर वनांचलों में सड़कों का जाल बिछ रहा है और शिक्षा, बिजली तथा स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं ग्रामीणों तक आसानी से पहुंच पा रही हैं।









