Supreme Court Rejected Bail: सहयोगियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय से खारिज; डेढ़ साल से फरार आरोपियों की तलाश तेज

VIKASH KHALKHO

Supreme Court Rejected Bail: रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और मध्य प्रदेश के कटनी से जुड़े एक बेहद हाई-प्रोफाइल और सनसनीखेज वित्तीय घोटाले में बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। कोलकाता पुलिस की एक विशेष टीम ने रायपुर में दबिश देकर 1000 करोड़ रुपये की महा-धोखाधड़ी और कॉर्पोरेट फर्जीवाड़े के मुख्य सूत्रधार महेंद्र गोयनका को गिरफ्तार कर लिया है।

यह कार्रवाई 18 जुलाई 2026 की दरमियानी रात को अंजाम दी गई, जिसके बाद कोलकाता पुलिस कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर आरोपी गोयनका को अपने साथ कोलकाता ले गई है। इस गिरफ्तारी के बाद मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई रसूखदार अधिकारियों, राजनेताओं और बड़े व्यापारियों के चेहरे बेनकाब होने की आशंका जताई जा रही है।

फर्जी हस्ताक्षर कर हथिया ली थीं कई कंपनियां

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, रायपुर निवासी महेंद्र गोयनका पूर्व में मध्य प्रदेश के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक संजय पाठक के परिवार के स्वामित्व वाली कंपनियों में काम करता था। वह ‘यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ में एक शीर्ष प्रबंधकीय (Top Managerial) पद पर तैनात था। इसी पद का दुरुपयोग करते हुए उसने पाठक परिवार के फर्जी हस्ताक्षर और कूट रचित (Forged) दस्तावेज तैयार किए। इन जाली कागजातों के सहारे उसने धीरे-धीरे पाठक परिवार की कई बहुमूल्य कंपनियों के मालिकाना हक और नियंत्रण पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया।

इस गंभीर जालसाजी को लेकर कोलकाता में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120बी (आपराधिक साजिश), 467, 468 और 471 (दस्तावेजों की जालसाजी) के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिसके आधार पर यह गिरफ्तारी हुई है।

बड़े आईएएस (IAS) अफसरों के काले धन को सफेद करने का आरोप

महेंद्र गोयनका की गिरफ्तारी सिर्फ एक कॉर्पोरेट फ्रॉड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार नौकरशाही के गहरे भ्रष्टाचार से भी जुड़े हैं। आरोप है कि गोयनका मध्य प्रदेश के कई कद्दावर आईएएस (IAS) अधिकारियों का वित्तीय रणनीतिकार था और उनके काले धन को विभिन्न शेल कंपनियों के माध्यम से सफेद (Money Laundering) करने का मुख्य काम देखता था। उसे मध्य प्रदेश के कुछ प्रभावशाली प्रशासनिक अधिकारियों और सत्ता से जुड़े दलालों का सीधा संरक्षण प्राप्त था, जिसके कारण वह अब तक बचा हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट से जमानत खारिज, सहयोगी पिछले दो साल से फरार

इस पूरे सिंडिकेट का जाल बेहद बड़ा है। महेंद्र गोयनका के अलावा उसकी कंपनियों के अन्य डायरेक्टर्स और सहयोगियों के खिलाफ मध्य प्रदेश के कटनी में भी धारा 420/120B/467/468/471 के तहत दो अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस मामले में शामिल सह-आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) द्वारा भी खारिज की जा चुकी हैं। इसके बावजूद, मध्य प्रदेश पुलिस की लचर कार्यप्रणाली के चलते वे सहयोगी पिछले करीब डेढ़ से दो वर्षों से लगातार फरार चल रहे हैं और अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

NCLT की सख्ती और निसर्ग इस्पात में हेरफेर

महेंद्र गोयनका के खिलाफ वित्तीय अपराधों के पुख्ता सिविल और क्रिमिनल साक्ष्य पहले भी सामने आ चुके हैं। मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने 9 मई 2025 को जारी अपने एक आदेश में महेंद्र गोयनका और उसकी पत्नी मीनू गोयनका द्वारा किए गए गंभीर वित्तीय गबन और अनियमितताओं को लेकर बेहद सख्त टिप्पणियां दर्ज की थीं। इसके अलावा, गोयनका की एक अन्य फ्लैगशिप कंपनी ‘निसर्ग इस्पात’ में भी बड़े पैमाने पर धन के अवैध हेरफेर और बोगस बिलिंग के जरिए करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ियों के मामले आधिकारिक जांच के दायरे में हैं। कोलकाता पुलिस अब गोयनका को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी, जिससे कई नए खुलासे होने तय हैं।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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