Administrative Decision: रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने शासकीय सेवकों की मृत्यु के उपरांत उनके विरुद्ध लंबित अनुशासनात्मक प्रकरणों के निराकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है। मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी शासकीय सेवक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रक्रियाधीन है और इस दौरान उसकी मृत्यु हो जाती है, तो ऐसे मामलों का निपटारा एक निश्चित और एकरूप प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
मृत्यु के बाद कब समाप्त होगी विभागीय जांच?
जीएडी द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार:
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यदि कोई प्रकरण गबन, शासन को वित्तीय क्षति पहुंचाने या धनराशि की वसूली से संबंधित है और कर्मचारी के जीवित रहते सक्षम प्राधिकारी द्वारा किसी भी प्रकार का वसूली आदेश (Recovery Order) पारित नहीं किया गया था, तो शासकीय सेवक की मृत्यु के पश्चात संबंधित विभागीय जांच को स्वतः समाप्त (Closed) माना जाएगा।
किस स्थिति में होगी देय स्वत्वों से वसूली?
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यदि शासकीय सेवक के जीवित रहते ही सक्षम प्राधिकारी द्वारा वित्तीय हानि या गबन के संबंध में वसूली का स्पष्ट आदेश जारी किया जा चुका था, तो नियमानुसार उसकी मृत्यु के उपरांत मिलने वाले देय स्वत्वों (जैसे पेंशन, ग्रेच्युटी या अन्य सेवानिवृत्ति देयक राशि) से उस राशि की वसूली की कार्रवाई की जाएगी।
सभी विभागों और जिला पंचायतों को जारी हुआ परिपत्र
सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में शासन के सभी विभागों, राजस्व मंडल के अध्यक्ष, सभी संभागायुक्तों, विभागाध्यक्षों तथा सभी जिलों की जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEOs) को कड़ाई से पालन हेतु दिशा-निर्देश भेज दिए हैं। राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य ऐसे वर्षों से लंबित प्रशासनिक प्रकरणों का पारदर्शी, न्यायसंगत, समयबद्ध और एकरूप तरीके से अंतिम निराकरण सुनिश्चित करना है।







