भोपाल: मध्यप्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के 19 सरकारी विश्वविद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े शैक्षणिक पदों को भरने की तैयारी तेज कर दी गई है। स्वीकृत 2003 शैक्षणिक पदों में से 1568 पद वर्तमान में रिक्त हैं, जिसके कारण विश्वविद्यालयों का संचालन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
केवल 22% नियमित स्टाफ पर चल रही पढ़ाई
स्थिति यह है कि विश्वविद्यालयों में महज 22 प्रतिशत नियमित शैक्षणिक स्टाफ के भरोसे शैक्षणिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इतने कम शिक्षकों के कारण छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध मार्गदर्शन और अकादमिक गतिविधियों में अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है।
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चार माह में भर्ती पूरी करने के निर्देश
उच्च शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी किए हैं कि प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के लगभग 78 प्रतिशत खाली पदों को अगले चार माह के भीतर अनिवार्य रूप से भरा जाए। विभाग का मानना है कि समयबद्ध भर्ती से शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता आएगी और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा।
70 हजार से अधिक छात्रों को होगा लाभ
इन 19 विश्वविद्यालयों में वर्तमान में 70 हजार से ज्यादा छात्र अध्ययनरत हैं। शिक्षकों की कमी सीधे तौर पर उनकी पढ़ाई, शोध कार्य और करियर मार्गदर्शन को प्रभावित कर रही थी। नई भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद छात्रों को विषय विशेषज्ञ शिक्षकों का मार्गदर्शन मिलेगा और विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।
उच्च शिक्षा सुधार की दिशा में अहम पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्धारित समयसीमा में भर्ती प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। इससे न केवल शिक्षण गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि शोध और नवाचार को भी नई गति मिलेगी।













