MP NEWS :भोपाल। मध्यप्रदेश में आदिवासियों को वन पट्टों के अधिकार दिलाने की लड़ाई में एक अहम मोड़ आया है। मुख्यमंत्री द्वारा वन ग्रामों का दोबारा सर्वे कराने और वंचित आदिवासियों को पट्टे देने की घोषणा के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे प्रदेश के आदिवासियों की जीत बताया है। हालांकि उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर नीति स्पष्ट करने की मांग की है।
MP NEWS :सिंघार ने याद दिलाया कि उन्होंने नेपानगर में बड़ी रैली कर सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया था और चेतावनी दी थी कि यदि समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा। इसके बाद सरकार ने वनग्रामों में फिर से सर्वे और पट्टा वितरण की घोषणा की।
MP NEWS :भोपाल में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह घोषणा स्वागत योग्य है, लेकिन यह सिर्फ एक “खाली घोषणा” बनकर न रह जाए, इसके लिए सरकार को कुछ बिंदुओं पर तत्काल स्पष्टता देना आवश्यक है।
MP NEWS :सिंघार के सवाल:
1. जिन 3.5 लाख वनाधिकार पट्टों को निरस्त किया गया, क्या उनका दोबारा सर्वे होगा?
2. जो 1.25 लाख नए आवेदन आए हैं, क्या वे भी इस सर्वे में शामिल किए जाएंगे?
3. सर्वे कब से शुरू होगा और इसकी समय-सीमा क्या होगी?
4. सर्वे के लिए कमेटी का गठन कब होगा और इसकी ज़िम्मेदारी किसकी होगी?
MP NEWS :उन्होंने कहा कि सरकार इन सवालों पर चुप है और जब तक इनका स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता, तब तक आदिवासियों को कोई ठोस लाभ नहीं मिलने वाला।
सिंघार ने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में तेजी से जंगल कटे हैं और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह देखा जाना चाहिए कि जंगल कौन काट रहा है — क्या इसमें वन विभाग की मिलीभगत है? आदिवासियों को बेवजह बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
MP NEWS :नेपानगर की रैली बनी बदलाव की वजह
MP NEWS :गौरतलब है कि नेता प्रतिपक्ष ने नेपानगर में आदिवासी अधिकारों को लेकर बड़ी रैली की थी और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। सरकार पर दबाव बढ़ने के बाद ही यह घोषणा सामने आई।











