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MP News : रिलायंस और NCL का कोयला-युक्त काला पानी बना जीवनदायिनी काचन नदी के लिए अभिशाप

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सिंगरौली। मध्य प्रदेश की ‘ऊर्जा नगरी’ सिंगरौली एक गंभीर औद्योगिक प्रदूषण की चपेट में है। जिले की जीवनरेखा मानी जाने वाली काचन नदी में नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) की गोरबी ब्लॉक बी खदान और रिलायंस अमलोरी परियोजना से कथित तौर पर कोयला-मिश्रित काला पानी छोड़ा जा रहा है। इस घोर लापरवाही के कारण नदी का पानी प्रदूषित हो गया है, जिसका सीधा खामियाजा लगभग 30 गांवों के हजारों लोगों को भुगतना पड़ रहा है और आगामी छठ पूजा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

कोयले का काला पानी बना ‘काला संकट’

स्थानीय लोगों और हाल ही में सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो के अनुसार, खदानों से निकलने वाला अपशिष्ट जल बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे काचन नदी में बहाया जा रहा है।

  • प्रदूषण का स्तर: नदी का पानी पूरी तरह काला पड़ चुका है, जिसमें भारी मात्रा में कोयला और रासायनिक तत्व मिले हुए हैं। यह न केवल जल गुणवत्ता को नष्ट कर रहा है, बल्कि जलीय जीवों के लिए भी खतरा बन गया है।
  • स्वास्थ्य और आस्था पर संकट: 30 गांवों के लोग इसी पानी का उपयोग पीने, स्नान और खेती के लिए करते हैं। ग्रामीणों ने खुजली और त्वचा रोगों की शिकायत की है। छठ पूजा निकट होने के कारण, श्रद्धालुओं को इसी दूषित पानी में स्नान करने को मजबूर होना पड़ेगा।
  • वीडियो में खुलासा: स्थानीय युवक द्वारा जारी वीडियो में स्टॉप डैम से 200–300 मीटर की दूरी पर कोयले का काला पानी नदी में सीधे बहता स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। युवक ने प्रशासन से छठ पर्व से पहले तत्काल रोक लगाने की अपील की है।

प्रशासन की अनदेखी और जनप्रतिनिधियों का आरोप

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन को बार-बार शिकायतें करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

  • पार्षद की शिकायत: नगर पालिका निगम सिंगरौली के पार्षद रामगोपाल पाल ने बताया, “कलेक्टर को एक हफ्ते पहले ज्ञापन देकर जानकारी दी गई थी और नगर निगम में भी आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। काला पानी लगातार नदी में मिल रहा है।”
  • विशेषज्ञों की राय: पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि कोयला खदानों का पानी लोहा, सीसा, पारा और आर्सेनिक जैसी भारी धातुओं से युक्त होता है। यह भूजल और मिट्टी को भी प्रदूषित करता है, जो भविष्य में एक बड़ी आपदा साबित हो सकता है।

छठ पूजा पर संकट: श्रद्धालुओं की मांग

काचन नदी इस क्षेत्र के लिए धार्मिक आस्था का केंद्र है, खासकर छठ महापर्व के दौरान। नदी के दूषित होने से हजारों श्रद्धालुओं की श्रद्धा और स्वास्थ्य दोनों पर संकट गहराया हुआ है।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की मुख्य मांगें हैं:

  1. प्रशासन तत्काल एनसीएल और रिलायंस खदानों से निकलने वाले प्रदूषित पानी के निकास पर रोक लगाए।
  2. प्रदूषित पानी को केवल ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से ही नदी में छोड़ा जाए।
  3. पर्यावरण विभाग मौके पर जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करे और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।

सिंगरौली की यह जीवनदायिनी नदी यदि समय रहते औद्योगिक कचरे से मुक्त नहीं हुई, तो पूरे क्षेत्र की पारिस्थितिकी और जनस्वास्थ्य गंभीर खतरे में पड़ जाएगा।

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