इंदौर। इंदौर की एक अदालत ने 2009 में उज्जैन में एक पत्रकार पर हुए हमले के 16 साल पुराने मामले में पाँच वकीलों को दोषी करार देते हुए सात साल की कठोर सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्रीकृष्ण डागलिया ने अपने 120 पन्नों के फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि यह हमला “न्याय के मंदिर” यानी अदालत परिसर में हुआ था, और जो लोग कानून के जानकार हैं, उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे उसकी रक्षा करें, न कि उल्लंघन।
गवाह बनने पहुँचे थे पत्रकार पटेल
यह मामला 10 फरवरी 2009 का है, जब पत्रकार घनश्याम पटेल उज्जैन की अदालत में गवाह के रूप में पेश होने पहुँचे थे। इसी दौरान वकील धर्मेंद्र शर्मा, शैलेंद्र शर्मा, भावेंद्र शर्मा और पुरुषोत्तम राय ने उन पर हमला कर दिया। आरोपियों ने पटेल को बुरी तरह पीटा, उनकी रिवॉल्वर, सोने की चेन और घड़ी छीन ली।
पाँचवाँ आरोपी सुरेंद्र शर्मा (90) को उम्रदराज़ होने के कारण तीन साल की साधारण सजा दी गई है।
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पूर्व न्यायाधीश से वकील बने अशोक कुमार शर्मा ने मीडिया को बताया कि आरोपियों में एक वकील और उसके दो बेटे शामिल थे। उन्होंने पटेल को धमकी दी थी कि यदि उन्होंने उनके खिलाफ गवाही दी तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
केस इंदौर स्थानांतरित हुआ
मामले की सुनवाई पहले उज्जैन में चल रही थी, लेकिन निष्पक्षता पर सवाल उठने के बाद हाईकोर्ट ने इसे इंदौर ट्रांसफर कर दिया। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद आखिरकार अदालत ने पत्रकार पर हमले की साजिश रचने वाले वकीलों को दोषी ठहराया।
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जज डागलिया ने फैसले में लिखा–
“जब कानून के जानकार ही अदालत के भीतर हिंसा और हत्या की कोशिश करेंगे, तो यह लोकतंत्र और न्यायपालिका दोनों पर गहरा आघात है।”











