MP Education Department Corruption : भोपाल (3 फरवरी 2026)। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने आज एक संयुक्त पत्रकार वार्ता के माध्यम से स्कूल शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) में चल रहे कथित ‘योजनाबद्ध भ्रष्टाचार’ का पर्दाफाश किया। प्रदेश कांग्रेस सचिव राजकुमार सिंह और प्रवक्ता संतोष सिंह परिहार व जितेंद्र मिश्रा ने दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाया कि विभाग में खुली प्रतिस्पर्धा को खत्म कर ‘कार्टेल मॉडल’ के जरिए सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है।
इंटरएक्टिव पैनल खरीद में बड़ा खेल कांग्रेस ने मुख्य रूप से स्कूलों में लगने वाले ‘इंटरएक्टिव पैनल’ की खरीद पर सवाल उठाए। दस्तावेजों के अनुसार:
- कीमतों में बड़ा अंतर: जिला स्तर पर जो पैनल ₹90,000 से ₹1,00,000 में खरीदे जा रहे थे, राज्य स्तर पर उनकी सामूहिक खरीद ₹1,14,000 प्रति यूनिट की गई।
- पक्षपात का आरोप: टेंडर की शर्तें इस तरह बनाई गईं कि LG और Samsung जैसी कंपनियां योग्य हो जाएं, जबकि कम रेट देने वाली Acer जैसी कंपनियों को तार्किक आधार के बिना बाहर कर दिया गया।
- दूसरे राज्यों से तुलना: कांग्रेस ने दावा किया कि असम सरकार ने यही उपकरण कहीं कम कीमत और बेहतर वारंटी के साथ खरीदे हैं।
क्या है ‘कार्टेल मॉडल’? कांग्रेस प्रवक्ताओं ने बताया कि अब L-1 (सबसे कम बोली) सिस्टम को खत्म कर 60-40 या 50-30-20 का नया मॉडल लाया गया है। इसमें पहले ही 2-3 कंपनियों का चयन कर लिया जाता है और काम आपस में बांट लिया जाता है। आरोप है कि यह मॉडल अब उच्च शिक्षा विभाग में भी लागू करने की तैयारी है और आने वाले समय के लिए करीब ₹1000 करोड़ के कार्यों की ‘बुकिंग’ पहले ही की जा चुकी है।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें:
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संबंधित मंत्री, उनके OSD, DPI अधिकारियों और टेंडर कमेटी के सदस्यों की कॉल डिटेल्स निकालकर उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो।
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सभी विवादित टेंडरों की L1 आधारित प्रणाली से पुनः समीक्षा की जाए।
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भ्रष्ट अधिकारियों और दलालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह जनता के पैसे की इस लूट के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी और भविष्य में इस कार्टेल मॉडल को खत्म करने के लिए बाध्य करेगी।













