Bhopal Lokayukta Corruption Case: स्टिंग के बाद मचा हड़कंप! DSP समेत कई अधिकारियों पर गिरी गाज

Bhopal Lokayukta Corruption Case: भोपाल लोकायुक्त घूसकांड ने मध्यप्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मीडिया स्टिंग के सामने आने के बाद लोकायुक्त संगठन के भीतर कथित रिश्वतखोरी और केस प्रभावित करने के आरोपों को लेकर बड़ा बवाल मच गया है। मामले के सार्वजनिक होते ही विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

भोपाल लोकायुक्त घूसकांड में सामने आए आरोपों के बाद लोकायुक्त कार्यालय में पदस्थ डीएसपी मंजू सिंह और डीएसपी बीएम द्विवेदी को उनके पद से हटा दिया गया है। दोनों अधिकारियों को वापस पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया है। सूत्रों के अनुसार उनके निलंबन का प्रस्ताव भी वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा गया है।

स्टिंग के बाद मचा हड़कंप
भोपाल लोकायुक्त घूसकांड उस समय चर्चा में आया जब एक मीडिया स्टिंग में कुछ कर्मचारियों को कथित तौर पर ट्रैप केस को कमजोर करने और जांच को प्रभावित करने की बात करते हुए दिखाया गया। वीडियो सामने आने के बाद विभाग के भीतर हड़कंप की स्थिति बन गई।

सात कर्मचारियों पर कार्रवाई
भोपाल लोकायुक्त घूसकांड में प्रारंभिक जांच के बाद कई कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विभाग ने दो हेड कांस्टेबल और एक कांस्टेबल को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा अन्य संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
Bhopal Lokayukta Corruption Case Update 1केस को कमजोर करने का आरोप
भोपाल लोकायुक्त घूसकांड में आरोप है कि एक ट्रैप केस को कमजोर करने और जांच की दिशा प्रभावित करने के बदले लाखों रुपये की मांग की गई थी। स्टिंग में कथित तौर पर कुछ कर्मचारियों को जांच प्रक्रिया को लंबा खींचने और रिपोर्ट पर असर डालने संबंधी बातें करते हुए दिखाया गया।

रिटायरमेंट तक मामला खींचने की चर्चा
भोपाल लोकायुक्त घूसकांड से जुड़े आरोपों में यह भी दावा किया गया कि एक आरोपी अधिकारी के मामले को रिटायरमेंट तक लंबा खींचने की बात कही गई थी। कथित तौर पर ऐसा होने पर संबंधित व्यक्ति की पेंशन और अन्य सरकारी लाभ प्रभावित नहीं होते। हालांकि इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
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तकनीकी रिपोर्ट को प्रभावित करने का आरोप
भोपाल लोकायुक्त घूसकांड में एक तकनीकी कर्मचारी पर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि वॉयस सैंपल और तकनीकी प्रक्रिया को प्रभावित करने के तरीके सुझाए गए थे। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब पूरे घटनाक्रम की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।

सरकार और विभाग दोनों पर बढ़ा दबाव
भोपाल लोकायुक्त घूसकांड के सामने आने के बाद सरकार और लोकायुक्त संगठन दोनों पर जवाबदेही का दबाव बढ़ गया है। भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली संस्था के भीतर ही ऐसे आरोप सामने आने से विपक्ष को भी सरकार पर हमला बोलने का मौका मिल गया है।

आगे क्या होगा?
भोपाल लोकायुक्त घूसकांड में फिलहाल विभागीय जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

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