Monday, September 7, 2026
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Raipur Soil Excavation Dispute: स्टे के बावजूद चलता रहा काम, खनिज विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

Raipur Soil Excavation Dispute:रायपुर मिट्टी उत्खनन विवाद राजधानी के कोलियारी क्षेत्र में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर स्थगन आदेश जारी होने के बावजूद तालाब क्षेत्र में मिट्टी उत्खनन और परिवहन का काम जारी रखा गया। इस मामले ने अब केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

रायपुर मिट्टी उत्खनन विवाद में सबसे बड़ा आरोप यह है कि राजस्व विभाग की ओर से रोक लगाए जाने के बाद भी मशीनों और भारी वाहनों के जरिए मिट्टी निकासी का काम चलता रहा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब किसी स्थल पर विवाद हो और प्रशासन रोक लगा चुका हो, तब संबंधित विभागों को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।

मौके पर पहुंची खनिज विभाग की टीम
रायपुर मिट्टी उत्खनन विवाद के बीच खनिज विभाग की एक टीम निरीक्षण के लिए मौके पर पहुंची। जानकारी के अनुसार निरीक्षण के दौरान क्षेत्र में उत्खनन से जुड़ी मशीनें और मिट्टी परिवहन में लगे कई वाहन मौजूद थे। हालांकि निरीक्षण के बाद किसी वाहन या मशीन को जब्त नहीं किया गया।यही बात अब ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। उनका कहना है कि यदि मौके पर गतिविधियां स्पष्ट थीं तो कार्रवाई नहीं होने का कारण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
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कार्रवाई नहीं होने से बढ़ा असंतोष
रायपुर मिट्टी उत्खनन विवाद में स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं कि क्या उत्खनन और परिवहन से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की गई थी। लोगों का कहना है कि यदि रॉयल्टी, अनुमति और अन्य जरूरी दस्तावेज वैध थे तो इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आनी चाहिए।ग्रामीणों का मानना है कि पारदर्शिता की कमी के कारण संदेह और विवाद दोनों बढ़ रहे हैं।

ग्रामीणों की सहमति वाले दावे पर नई बहस
रायपुर मिट्टी उत्खनन विवाद में खनिज विभाग की ओर से यह कहा गया कि कार्य ग्रामीणों की सहमति से किया जा रहा था और संबंधित पक्षों को फिलहाल काम रोकने की समझाइश दी गई है। लेकिन इस बयान के बाद विवाद और तेज हो गया है।स्थानीय लोगों और कानूनी जानकारों का कहना है कि केवल मौखिक सहमति के आधार पर खनिज या मिट्टी उत्खनन की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके लिए विभागीय स्वीकृति और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन जरूरी होता है।

नियमों के पालन को लेकर उठे सवाल
रायपुर मिट्टी उत्खनन विवाद में अब मुख्य सवाल यह है कि क्या सभी गतिविधियां नियमानुसार संचालित की जा रही थीं। यदि क्षेत्र में स्थगन आदेश प्रभावी था, तो उत्खनन और परिवहन की अनुमति किस आधार पर जारी रही, यह स्पष्ट होना बाकी है।इसी कारण मामले में निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज होती जा रही है।

विभाग की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा
रायपुर मिट्टी उत्खनन विवाद ने खनिज विभाग की कार्यशैली पर भी बहस शुरू कर दी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में अवैध उत्खनन या बिना अनुमति परिवहन मिलने पर विभाग त्वरित कार्रवाई करता है। ऐसे में इस मामले में अलग रवैया क्यों दिखाई दिया, यह सवाल लगातार उठ रहा है।

प्रशासन से पारदर्शिता की मांग
रायपुर मिट्टी उत्खनन विवाद अब प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।वहीं यदि सभी प्रक्रियाएं नियमों के तहत हुई हैं, तो प्रशासन को तथ्यों को सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर
रायपुर मिट्टी उत्खनन विवाद में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि स्थगन आदेश के बावजूद गतिविधियां कैसे जारी रहीं और निरीक्षण के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। जब तक प्रशासन की ओर से स्पष्ट जवाब सामने नहीं आता, तब तक यह मामला चर्चा और सवालों के केंद्र में बना रह सकता है।

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