MP News: बैतूल वन विभाग में गजब मामला! जंगल की सुरक्षा छोड़ मलबा ढोते दिखे चौकीदार, उड़नदस्ते की गाड़ी भी लगी

Rahul Goshwami

Betul Forest Department: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में वन विभाग से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कामकाज और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जंगल की सुरक्षा और गश्त के लिए तैनात चौकीदारों से मलबा उठाने का काम कराया जा रहा है। इतना ही नहीं, वन अपराधों की रोकथाम के लिए इस्तेमाल होने वाले उड़नदस्ते के वाहन से ईंटों की ढुलाई किए जाने की बात भी सामने आई है।मामला उत्तर वन मंडल की बैतूल रेंज का बताया जा रहा है। यहां वन विद्यालय परिसर, जो फिलहाल वृत्त कार्यालय परिसर के रूप में इस्तेमाल हो रहा है, वहां से भवन के मलबे को हटाने का काम चल रहा है। आरोप है कि बैतूल रेंजर के मौखिक निर्देश पर विभागीय कर्मचारियों को इस काम में लगाया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, वृत्त कार्यालय परिसर में एक पुराने भवन को डिस्मेंटल किए जाने के बाद बड़ी मात्रा में मलबा निकला है। इसी मलबे में मौजूद ईंटों को बैतूल रेंज कार्यालय तक ले जाने का काम किया जा रहा है।आरोप है कि इस काम में एक डिप्टी रेंजर के साथ बैतूल रेंज के तीन चौकीदारों को लगाया गया है। चौकीदारों के हाथों में जंगल की सुरक्षा से जुड़े उपकरणों की जगह तसला नजर आने की बात कही जा रही है।सवाल यह है कि जिन कर्मचारियों की जिम्मेदारी जंगल में गश्त करने, वन क्षेत्र की निगरानी करने और अवैध गतिविधियों पर नजर रखने की है, उन्हें इस तरह के काम में लगाने से उनकी मूल ड्यूटी प्रभावित नहीं हो रही है?

उड़नदस्ते के वाहन से ढोई जा रही ईंटें
इस मामले में सरकारी वाहन के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि वन विभाग के उड़नदस्ते के वाहन का इस्तेमाल मलबे से निकली ईंटों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।उड़नदस्ते के वाहन सामान्य तौर पर वन अपराधों की निगरानी, अवैध कटाई और वन क्षेत्र में कार्रवाई जैसे कामों में इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में यदि वाहन को निर्माण सामग्री ढोने में लगाया गया है, तो इसके लिए विभागीय स्तर पर अनुमति या आदेश था या नहीं, यह जांच का विषय है।

एपीसीसीएफ की मौजूदगी में उठे सवाल
मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि बताया जा रहा है कि एपीसीसीएफ स्तर के अधिकारी इन दिनों बैतूल में निरीक्षण के लिए मौजूद हैं। वृत्त कार्यालय परिसर में ऑडिट की प्रक्रिया चलने की भी जानकारी सामने आई है।ऐसे में वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी के दौरान कर्मचारियों से मलबा उठवाने और विभागीय वाहन से ईंटों की ढुलाई कराए जाने के आरोप कई सवाल खड़े करते हैं। क्या यह काम किसी विभागीय आदेश के तहत कराया जा रहा है या फिर स्थानीय स्तर पर मौखिक निर्देश दिए गए हैं, इसे स्पष्ट किया जाना बाकी है।

नवनिर्मित भवन की दीवार गिरने से निर्माण पर सवाल
मामले का एक दूसरा पहलू बैतूल रेंज कार्यालय के नवनिर्मित भवन से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले बनाए गए इस भवन के शौचालय की दीवार गिर गई थी।अब इस दीवार के दोबारा निर्माण के लिए वृत्त कार्यालय परिसर से निकली पुरानी ईंटों का इस्तेमाल किए जाने की बात कही जा रही है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।हालांकि, भवन निर्माण में गुणवत्ता संबंधी किसी गड़बड़ी की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। दीवार गिरने की घटना और उसके पुनर्निर्माण में पुरानी ईंटों के इस्तेमाल को लेकर विभागीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
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क्या सरकारी संसाधनों का हो रहा है इस्तेमाल?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सरकारी कर्मचारियों और वाहन के इस्तेमाल को लेकर है। यदि चौकीदारों को उनकी नियमित वन सुरक्षा ड्यूटी से हटाकर मलबा उठाने में लगाया गया और उड़नदस्ते के वाहन का उपयोग निर्माण सामग्री ढोने में हुआ, तो इसके लिए जिम्मेदारी और आदेश की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।यह भी सामने आना जरूरी है कि क्या इस काम के लिए कोई लिखित आदेश जारी किया गया था या मौखिक निर्देश के आधार पर कर्मचारियों और वाहन का इस्तेमाल किया गया।

जांच और कार्रवाई पर टिकी नजर
इस मामले में वन मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से अभी स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है। खास तौर पर यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि चौकीदारों को मलबा हटाने के काम में लगाने और उड़नदस्ते के वाहन से ईंटें ढोने की अनुमति किस स्तर से दी गई थी।साथ ही, रेंज कार्यालय के नवनिर्मित भवन की दीवार गिरने के मामले में निर्माण की गुणवत्ता की जांच हुई है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है।अब देखना होगा कि विभाग इस पूरे मामले में जांच कराता है या नहीं और यदि नियमों के विपरीत काम पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।

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