Mahadev Betting Case: रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। ओमान से प्रत्यर्पण के बाद भारत लाए गए सौरभ को आज रायपुर की विशेष CBI कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान उसके वकील तुषार गिरी ने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए CBI की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। वहीं, जांच एजेंसी ने पूछताछ के लिए 10 दिन की कस्टोडियल रिमांड की मांग की है।
सौरभ की पेशी को देखते हुए कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। सुनवाई के दौरान ED के अधिकारी और वकील भी मौजूद रहे।
प्रत्यर्पण की शर्तों पर वकील ने उठाए सवाल
कोर्ट में सौरभ चंद्राकर के वकील ने ओमान की अदालत के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि भारत की ओर से भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोध में ED के मामले को मंजूरी मिली थी, जबकि CBI के मामले को मंजूरी नहीं दी गई थी।
वकील का तर्क है कि प्रत्यर्पण की शर्तों के अनुसार सौरभ के खिलाफ उन्हीं मामलों में कार्रवाई की जा सकती है, जिनके आधार पर उसे भारत लाया गया है। ऐसे में CBI द्वारा उसे अपने मामले में गिरफ्तार कर रिमांड पर लेने की कार्रवाई नियमों के खिलाफ है।
CBI ने कहा- गिरफ्तारी पर फैसला रायपुर कोर्ट करेगी
CBI की ओर से दलील दी गई कि सौरभ के खिलाफ रायपुर की विशेष अदालत पहले ही ओपन एंडेड गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी थी। ओमान सरकार से मिली जानकारी और कानूनी प्रक्रिया के बाद उसे भारत लाया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि ED और CBI के मामले आपस में जुड़े हुए हैं। प्रत्यर्पण की शर्तों और मुकदमा चलाने के अधिकार से संबंधित सवालों पर रायपुर की विशेष अदालत ही फैसला करेगी। CBI ने फिलहाल सौरभ से पूछताछ के लिए 10 दिन की कस्टोडियल रिमांड मांगी है।
Mahadev Betting Case: करीब 6 हजार करोड़ के सट्टा घोटाले का आरोपी
सौरभ चंद्राकर करीब 6 हजार करोड़ रुपये के महादेव ऑनलाइन सट्टा घोटाले में मुख्य आरोपियों में शामिल है। CBI के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगियों ने मिलकर महादेव बुक ऐप को प्रमोट किया था। आरोप है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म और पैनल तैयार किए गए थे, जिनके जरिए देशभर में नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। जांच एजेंसी का दावा है कि सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद लेनदेन के जरिए पैसे को छिपाकर हवाला के माध्यम से विदेश भेजा जाता था। नेटवर्क को बिना रुकावट चलाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत दिए जाने के आरोप भी जांच में सामने आए हैं।
Mahadev Betting Case: 116 दिन बाद ओमान से भारत लाया गया सौरभ
CBI के अनुसार, महादेव सट्टा नेटवर्क की जांच शुरू होने के बाद से ही सौरभ चंद्राकर फरार था। वह 2023 से दुबई में रह रहा था और उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। जांच एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कथित तौर पर फर्जी पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। इसके बाद वह UAE से ओमान पहुंच गया। खुफिया जानकारी और रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर 8 जुलाई 2026 को ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था।
इसके बाद भारत सरकार, CBI, ED, इंटरपोल और ओमान के अधिकारियों के बीच प्रत्यर्पण को लेकर प्रक्रिया पूरी की गई। CBI की टीम 1 नवंबर को मस्कट पहुंची और सौरभ को भारत लेकर आई। इससे पहले उसे दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर हुई थी।
राजनीतिक कनेक्शन और पैसों के लेन-देन पर खुल सकते हैं राज
ओमान में हिरासत के दौरान सौरभ ने कथित तौर पर महादेव सट्टा नेटवर्क के राजनीतिक कनेक्शन, पैसों के लेन-देन और विदेशों में मौजूद संपत्तियों से जुड़ी जानकारी देने की बात कही थी। उसने अपनी और परिवार की सुरक्षा की मांग भी की थी। सौरभ का दावा था कि नेटवर्क से जुड़े प्रभावशाली लोग उसे और उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उसने जांच एजेंसियों के सामने बिना दबाव अपना पक्ष रखने का मौका देने की मांग की थी।
CM साय बोले- बड़ा खुलासा होगा
सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने CBI को बधाई दी। उन्होंने कहा कि महादेव सट्टा ऐप से मिलने वाली प्रोटेक्शन मनी किन-किन लोगों तक पहुंचती थी, इसका बड़ा खुलासा हो सकता है। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सौरभ चंद्राकर के खिलाफ कार्रवाई कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही शुरू हो गई थी। उस दौरान 70 से अधिक FIR दर्ज की गई थीं। कई गिरफ्तारियां भी हुई थीं और सट्टा ऐप पर रोक लगाने के लिए कानून भी बनाया गया था।
CBI और ED दोनों कर रही हैं जांच
Mahadev Betting Case: छत्तीसगढ़ सरकार ने महादेव सट्टा ऐप से जुड़े 13 मामलों की जांच CBI को सौंपी थी। इनमें से दो मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। दूसरी ओर, ED मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है और सौरभ के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुकी है। अब सौरभ से पूछताछ के जरिए सट्टा नेटवर्क के संचालन, कथित राजनीतिक और प्रशासनिक कनेक्शन, हवाला कारोबार और विदेशों में मौजूद संपत्तियों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा सकती है। इस मामले में आगे होने वाली सुनवाई और रिमांड पर अदालत का फैसला अहम होगा।