Tikamgarh Ration Scam: टीकमगढ़ में राशन घोटाले पर बड़ी कार्रवाई, 7 दुकान विक्रेताओं पर FIR के निर्देश; 62.78 लाख के खाद्यान्न गबन का आरोप

Anuj Nirala
Tikamgarh Ration Scam

[nishaanebaz.com] Tikamgarh Ration Scam: टीकमगढ़। मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में गरीब हितग्राहियों के लिए आवंटित सरकारी राशन में कथित गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। जिला प्रशासन ने 7 शासकीय उचित मूल्य दुकान के विक्रेताओं के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। इन दुकानों में जांच के दौरान गेहूं, चावल और नमक समेत करीब 62 लाख 78 हजार रुपये के खाद्यान्न के गबन का मामला सामने आने का दावा किया गया है।

मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित राशन दुकानों के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक की जांच कराई। जांच रिपोर्ट में रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध खाद्यान्न के बीच बड़ा अंतर पाए जाने की बात सामने आई है।

इन 7 राशन दुकानों की मिली थीं शिकायतें

जानकारी के अनुसार टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोतिय को जिले की छिपरी, बिजरावन, बजीतपुर, बड़ागांव, सूरजपुर, भेलसी और अजनौर स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकानों को लेकर शिकायतें मिली थीं।शिकायतों में गरीब हितग्राहियों के लिए आवंटित खाद्यान्न के वितरण में अनियमितता और हेराफेरी के आरोप लगाए गए थे। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने संबंधित दुकानों की जांच कराने के निर्देश दिए।जांच के दौरान दुकानों के दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक रूप से उपलब्ध खाद्यान्न का मिलान किया गया।

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रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में मिला बड़ा अंतर

जांच में कथित तौर पर राशन दुकानों के रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर पाया गया। अधिकारियों के अनुसार, गरीब परिवारों को वितरण के लिए आवंटित खाद्यान्न की मात्रा रिकॉर्ड में अलग थी, जबकि भौतिक सत्यापन के दौरान उतनी सामग्री मौके पर उपलब्ध नहीं मिली।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक गेहूं, चावल और नमक समेत अन्य खाद्यान्न में अनियमितता सामने आई। कुल मिलाकर करीब 62 लाख 78 हजार रुपये के खाद्यान्न के गबन का आरोप संबंधित दुकान विक्रेताओं पर लगाया गया है।

गरीबों के राशन में हेराफेरी का आरोप

सरकारी उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में राशन के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर मिलने से वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।प्रशासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोप है कि हितग्राहियों के लिए आवंटित गेहूं, चावल और नमक में बड़े स्तर पर हेराफेरी की गई। अब प्रशासन संबंधित दुकानदारों की भूमिका और खाद्यान्न के पूरे रिकॉर्ड की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।

आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत FIR के निर्देश

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने संबंधित दुकान विक्रेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत FIR दर्ज कराने को कहा गया है।FIR के बाद पुलिस मामले की जांच करेगी और यह पता लगाया जाएगा कि कथित तौर पर खाद्यान्न की कमी कैसे हुई, रिकॉर्ड में किस तरह की गड़बड़ी की गई और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

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कलेक्टर बोले- गरीबों के हक से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

मामले को लेकर कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने स्पष्ट किया है कि गरीब हितग्राहियों के हक के राशन में किसी भी तरह की गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद जिले की अन्य शासकीय उचित मूल्य दुकानों की व्यवस्था पर भी निगरानी बढ़ने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि राशन वितरण में पारदर्शिता बनाए रखना और पात्र हितग्राहियों तक उनका पूरा खाद्यान्न पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।

अब पुलिस जांच में सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल जांच रिपोर्ट के आधार पर सात राशन दुकान विक्रेताओं के खिलाफ FIR की कार्रवाई शुरू की जा रही है। करीब 62.78 लाख रुपये के खाद्यान्न के कथित गबन का यह मामला सामने आने के बाद अब पुलिस जांच में दस्तावेज, स्टॉक और वितरण रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी।जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खाद्यान्न की कथित कमी किस स्तर पर हुई और इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं।

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