Arundev Gautam appointed DGP : अरुणदेव गौतम बने छत्तीसगढ़ के स्थायी DGP: 17 महीने बाद मिली फुल-टाइम जिम्मेदारी, सरकार ने जारी किया आदेश

Arundev Gautam appointed DGP :रायपुर : रायपुर में छत्तीसगढ़ सरकार ने आईपीएस अधिकारी अरुणदेव गौतम को राज्य का स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त कर दिया है। गृह विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह ने 16 मई को इसका आदेश जारी किया। गौतम पिछले 17 महीनों से प्रभारी डीजीपी के रूप में काम कर रहे थे।

Arundev Gautam appointed DGP :अरुणदेव गौतम की स्थायी नियुक्ति को लेकर पहले से चर्चा थी और अब सरकार के आदेश के साथ इस पर आधिकारिक मुहर लग गई है। वे 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और अपने लंबे प्रशासनिक एवं पुलिस अनुभव के लिए जाने जाते हैं।

Arundev Gautam appointed DGP :अरुणदेव गौतम को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। वर्ष 2002 में कोसोवा में सेवा देने पर उन्हें संयुक्त राष्ट्र पदक मिला था। इसके अलावा उन्हें 2010 में भारतीय पुलिस पदक और 2018 में विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया।

Arundev Gautam appointed DGP :उत्तरप्रदेश के कानपुर के रहने वाले अरुणदेव गौतम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए और राजनीति शास्त्र में एमए किया। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल की डिग्री हासिल की। यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद वे 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी बने।

 

Arundev Gautam appointed DGP :छत्तीसगढ़ गठन के बाद उन्होंने राज्य कैडर चुना और कोरिया, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव, सरगुजा और बिलासपुर जैसे जिलों में एसपी के रूप में सेवाएं दीं। नक्सल प्रभावित इलाकों में उनकी भूमिका अहम मानी जाती रही है।

Arundev Gautam appointed DGP :2009 में राजनांदगांव नक्सली हमले के बाद उन्हें वहां की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वहीं झीरम घाटी हमले के बाद उन्हें बस्तर आईजी बनाया गया, जहां उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था संभाली।

Arundev Gautam appointed DGP :अरुणदेव गौतम गृह सचिव, जेल, परिवहन, नगर सेना और अग्निशमन सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व भी संभाल चुके हैं। प्रशासनिक अनुभव और फील्ड पोस्टिंग दोनों में उनका लंबा रिकॉर्ड रहा है।

Arundev Gautam appointed DGP :सुप्रीम कोर्ट के 2006 के निर्देशों के अनुसार, राज्य सरकारें यूपीएससी द्वारा सुझाए गए तीन वरिष्ठ अधिकारियों में से डीजीपी नियुक्त करती हैं। चयनित अधिकारी को कम से कम दो साल का कार्यकाल दिया जाता है, चाहे उसकी रिटायरमेंट तिथि कुछ भी हो।

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