स्कूल मैदान के पास कैसे बनी इतनी गहरी खदान?
रीवा में दो छात्रों की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल उस खदान की सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गढ़ के खेल मैदान के पास एक गहरी खदान बनी हुई थी, जिसमें बारिश के बाद पानी भर गया था।कार्यक्रम खत्म होने के बाद दोनों बच्चे खेल मैदान के समीप पहुंचे। इसी दौरान वे पानी से भरी खदान में डूब गए। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी गई।
कौन थे हादसे का शिकार हुए दोनों बच्चे?
रीवा में दो छात्रों की मौत की घटना में सुभाष सोनी और शिव पाठक की जान गई। सुभाष सोनी, पिता रजनीश सोनी, करीब 13 वर्ष का था और खर्रा, थाना नईगढ़ी, जिला मऊगंज का रहने वाला था। वह गढ़ के बाल भारती स्कूल में पढ़ता था।दूसरा छात्र शिव पाठक, पिता पूर्णेंद्र पाठक, तेडताल, थाना नईगढ़ी, जिला मऊगंज का निवासी था। वह पतंजलि पब्लिक स्कूल गढ़ में पढ़ाई कर रहा था।दोनों छात्र स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने गढ़ आए थे। कार्यक्रम खत्म होने के बाद यह दर्दनाक हादसा हो गया।
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तलाश के बाद पानी से बाहर निकाले गए बच्चे
रीवा में दो छात्रों की मौत की खबर फैलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। गढ़ पुलिस को सूचना दी गई और बच्चों की तलाश शुरू की गई।स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से दोनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला गया। उनकी हालत गंभीर होने के कारण उन्हें इलाज के लिए भेजा गया। बाद में दोनों को रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय रेफर किया गया।हालांकि डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिवारों में चीख-पुकार मच गई।
खदान की सुरक्षा पर अब सबसे बड़ा सवाल
रीवा में दो छात्रों की मौत के बाद खदान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर बताया जा रहा है कि मिट्टी उत्खनन के कारण यहां गहरा गड्ढा बना था और बारिश के बाद उसमें पानी भर गया।सवाल यह है कि अगर खदान इतनी गहरी और खतरनाक थी तो उसके आसपास सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए? वहां बाड़, बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड क्यों नहीं लगाया गया?
स्कूल और खेल मैदान के पास खतरे को क्यों नहीं पहचाना गया?
रीवा में दो छात्रों की मौत ने प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े किए हैं। अगर खदान स्कूल के खेल मैदान के इतने करीब थी तो बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इसे पहले ही सुरक्षित क्यों नहीं कराया गया?यह भी जांच का विषय है कि वहां मिट्टी का उत्खनन किसकी अनुमति से हुआ था। कितनी जमीन पर खुदाई की गई और क्या उत्खनन के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था, इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज
रीवा में दो छात्रों की मौत के बाद अब केवल संवेदना व्यक्त करने के बजाय जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी सामने आ रहा है कि अगर नियमों का उल्लंघन हुआ था तो संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।प्रशासन को यह भी देखना होगा कि गढ़ और आसपास के क्षेत्रों में स्कूल, खेल मैदान और आबादी के पास ऐसे दूसरे खतरनाक गड्ढे या पानी से भरी खदानें तो मौजूद नहीं हैं।
दो बच्चों की मौत से पूरे क्षेत्र को मिली बड़ी चेतावनी
रीवा में दो छात्रों की मौत केवल दो परिवारों की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह प्रशासन और स्थानीय व्यवस्था के लिए भी गंभीर चेतावनी है। बारिश के मौसम में खुले गड्ढे, खदानें और जलभराव वाले स्थान बच्चों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।ऐसे स्थानों की पहचान कर वहां तत्काल बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए जाने की जरूरत है। स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, खेल मैदानों और आबादी के आसपास मौजूद खतरनाक स्थानों का सर्वे भी कराया जाना चाहिए।इस हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार व्यवस्था खतरा सामने आने से पहले कब जागेगी?