MP News: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के मंडीदीप स्थित एक निजी अस्पताल पर आयुष्मान योजना के तहत इलाज और मरीज से पैसे मांगने को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित मजदूर राजेंद्र पवार का आरोप है कि दांतों के इलाज के दौरान उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रखा गया और उनके दांत निकाल दिए गए। अब नए दांत लगाने के लिए उनसे 20 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। शिकायत सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने जांच टीम को अस्पताल भेजा है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
दांतों के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे मजदूर
मामला रायसेन जिले के औद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप के दीप नगर स्थित गंगा अस्पताल का बताया जा रहा है। पीड़ित राजेंद्र पवार के मुताबिक, वह दांतों में परेशानी होने पर इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे। उनका आरोप है कि इलाज के दौरान उनके दांत निकाल दिए गए और उन्हें करीब 15 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रखा गया।राजेंद्र का कहना है कि इसके बाद नए दांत लगाने के लिए उन्हें लगभग एक महीने बाद फिर अस्पताल बुलाया गया। आरोप है कि दोबारा आने के बाद उन्हें पिछले पांच दिनों से फिर वार्ड में भर्ती रखा गया है।
नए दांत लगाने के लिए 20 हजार रुपये मांगने का आरोप
पीड़ित मजदूर ने आरोप लगाया है कि आयुष्मान योजना के तहत इलाज होने के बावजूद नए दांत लगाने के लिए उनसे 20 हजार रुपये नकद मांगे जा रहे हैं। इस शिकायत के बाद अस्पताल में इलाज की प्रक्रिया और मरीज से कथित तौर पर की जा रही वसूली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को निर्धारित नियमों के तहत अस्पताल में इलाज की सुविधा देना है। ऐसे में यदि किसी मरीज से योजना के तहत शामिल इलाज के लिए अनुचित तरीके से अतिरिक्त रकम मांगी गई है, तो इसकी जांच जरूरी है। हालांकि, इस मामले में संबंधित इलाज योजना के दायरे में था या नहीं और अस्पताल ने किस आधार पर रकम मांगी, यह आधिकारिक जांच में स्पष्ट होना बाकी है।
CMHO ने अस्पताल भेजी जांच टीम
मामले की शिकायत सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने संज्ञान लिया और जांच टीम को गंगा अस्पताल भेजा। पीड़ित राजेंद्र पवार ने जांच अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कैमरे पर भी अस्पताल में इलाज के दौरान हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी।अब जांच में यह देखना अहम होगा कि मरीज को किन परिस्थितियों में भर्ती किया गया, कौन-सी चिकित्सा प्रक्रिया अपनाई गई और आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल ने कितना दावा प्रस्तुत किया। मरीज से 20 हजार रुपये मांगने के आरोप की भी जांच की जानी चाहिए।
जांच के दायरे को लेकर भी उठे सवाल
मामले में कुछ अन्य मरीजों को भी अनुचित तरीके से भर्ती रखने और कथित फर्जी दावों की चर्चा होने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह जरूरी है कि जांच केवल एक मरीज के बयान तक सीमित न रहे और संबंधित रिकॉर्ड, भर्ती विवरण, इलाज की फाइलों तथा योजना के तहत किए गए दावों की नियमानुसार पड़ताल की जाए।यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन का पक्ष और जांच की अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।
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आयुष्मान योजना के इस्तेमाल पर निगरानी जरूरी
यह मामला स्वास्थ्य योजनाओं के तहत इलाज की पारदर्शिता और मरीजों के अधिकारों से जुड़ा है। यदि किसी पात्र मरीज से योजना में शामिल इलाज के लिए अनुचित अतिरिक्त भुगतान मांगा जाता है या गलत तरीके से दावा प्रस्तुत किया जाता है, तो यह गंभीर विषय है।अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग की जांच पर हैं। जांच में अस्पताल के दस्तावेजों, इलाज के रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़ी जानकारी की समीक्षा से आरोपों की सच्चाई सामने आ सकती है।