MP News: शशांक सोनकपुरिया\ बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की मुलताई विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पोहर में बदहाल सड़क का मुद्दा अब सोशल मीडिया पर जोर पकड़ चुका है। लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे ग्रामीणों ने जब अपनी परेशानी के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए तो मामला तेजी से लोगों के बीच चर्चा में आया। बारिश के दौरान सड़क पर कीचड़ और गड्ढों के कारण ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पोहर की मुख्य सड़क लंबे समय से खराब स्थिति में है। बारिश के दिनों में यहां आवागमन मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चों, ग्रामीणों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण पहले भी आंदोलन और विरोध का रास्ता अपना चुके हैं। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, सड़क को लेकर पहले भी आश्वासन दिए गए, लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि जमीनी स्तर पर समस्या बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए सड़क के वीडियो
इस बार ग्रामीणों ने सड़क की बदहाली को सोशल मीडिया के जरिए सामने रखना शुरू किया। सड़क पर कीचड़, गड्ढों और बदहाल रास्ते के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल होने लगे। इसके बाद कुछ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर भी पोहर पहुंचे और ग्रामीणों की समस्या को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग शुरू की।सोशल मीडिया पर मामला लगातार चर्चा में आने के बाद सड़क का मुद्दा एक बार फिर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने प्रमुखता से उठा।
Read More: MP: स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव के नाम से भी जनरेट हुए नर्सिंग रजिस्ट्रेशन नंबर, पोर्टल पर सवाल
विधायक ने रील के जरिए दिया आश्वासन
मामले के बीच मुलताई विधायक चंद्रशेखर देशमुख की ओर से सोशल मीडिया पर एक वीडियो/रील जारी कर सड़क की समस्या को लेकर आश्वासन दिया गया। विधायक के इस वीडियो के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों की ओर से फिलहाल आंदोलन को तीन महीने के लिए स्थगित करने का फैसला लिया गया।
MP News: पोहर की बदहाल सड़क पर सोशल मीडिया आंदोलन, विधायक चंद्रशेखर देशमुख ने रील जारी कर दिया आश्वासन; 3 महीने के लिए आंदोलन स्थगित#MPNews #PoharRoad #BetulNews #MultaiNews #ChandrashekharDeshmukh #PoharNews #RoadProblem #RoadProtest #SocialMediaProtest #MadhyaPradeshNews pic.twitter.com/B8IEmK6RfE
— Nishaanebaz.com (@nishaanebaz_com) September 28, 2026
यानी सड़क की समस्या को लेकर शुरू हुआ विरोध फिलहाल थम गया है, लेकिन ग्रामीणों की मांग अभी खत्म नहीं हुई है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि अगर तय अवधि में सड़क की समस्या का समाधान नहीं होता है तो वे दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
तीन महीने बाद जिला मुख्यालय पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
आंदोलन से जुड़े लोगों ने चेतावनी दी है कि तीन महीने के भीतर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो जिला मुख्यालय पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इसमें करीब 50 गांवों की समस्याओं को उठाने की बात कही गई है।ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क का स्थायी समाधान चाहिए। उनका कहना है कि बारिश के दौरान सड़क की स्थिति बेहद खराब हो जाती है और इससे रोजमर्रा का आवागमन प्रभावित होता है।
Read More: Ujjain: मस्जिद विवाद पर ओवैसी ने उठाए वक्फ कानून पर सवाल, इमरान प्रतापगढ़ी ने भी जताई आपत्ति
अब रील के बाद जमीन पर काम का इंतजार
पोहर की सड़क का मुद्दा अब एक अलग वजह से भी चर्चा में है। सड़क की मांग सोशल मीडिया के जरिए उठी, वीडियो वायरल हुए और इसके बाद विधायक की ओर से भी सोशल मीडिया पर आश्वासन सामने आया।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सोशल मीडिया अभियान जमीनी स्तर पर सड़क निर्माण का रास्ता भी तैयार करेगा?
तीन महीने के लिए आंदोलन स्थगित होने के बाद अब ग्रामीणों की नजर सड़क निर्माण की अगली कार्रवाई पर है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विधायक की ओर से दिया गया आश्वासन कब तक धरातल पर उतरता है और पोहर के ग्रामीणों को बदहाल सड़क से कब राहत मिलती है।ग्रामीणों की मांग साफ है—उन्हें सोशल मीडिया पर आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर पक्की सड़क चाहिए।






