[Nishaanebaz news] Indore Police Fake Marksheet: इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर पुलिस विभाग से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लंबे समय तक चलने वाली भर्ती और दस्तावेज जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस रेडियो प्रशिक्षण स्कूल में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक कौशलेंद्र सिंह चौहान पर कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज के आधार पर नौकरी हासिल करने का आरोप लगा है। इंदौर पुलिस ASI फर्जी मार्कशीट मामले में जांच के बाद अब एफआईआर दर्ज की गई है।
30 साल पुरानी नौकरी पर अब उठे सवाल
जानकारी के मुताबिक, कौशलेंद्र सिंह चौहान के खिलाफ कुछ समय पहले शिकायत मिली थी। शिकायत के बाद विभाग ने उनके शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ी तो उनकी 10वीं की मार्कशीट को लेकर सवाल खड़े हो गए। इंदौर पुलिस ASI फर्जी मार्कशीट मामले में जांच के दौरान सामने आई जानकारी ने अधिकारियों को भी चौंका दिया।
10वीं की मार्कशीट का बोर्ड में नहीं मिला रिकॉर्ड
विभाग ने कौशलेंद्र सिंह चौहान की 10वीं की मार्कशीट की जानकारी मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल से मांगी। बोर्ड के रिकॉर्ड की जांच में कथित तौर पर उनकी मार्कशीट से जुड़ा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद दस्तावेज की असलियत को लेकर संदेह और गहरा गया। इंदौर पुलिस ASI फर्जी मार्कशीट की जांच में यही बिंदु अब सबसे अहम माना जा रहा है।जांच के बाद विभागीय स्तर पर रिपोर्ट तैयार कर वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई। इसी कार्रवाई के दौरान कौशलेंद्र सिंह चौहान को निलंबित भी किया गया था। अब मामला केवल विभागीय जांच तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि पुलिस ने आपराधिक केस भी दर्ज कर लिया है।
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जांच रिपोर्ट के बाद थाने में दर्ज हुई FIR
पूरे मामले की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक रेडियो चंद्रशेखर चंद्रावत ने मल्हारगंज थाने को पत्र भेजकर केस दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद गुरुवार को कौशलेंद्र सिंह चौहान के खिलाफ धोखाधड़ी समेत संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। इंदौर पुलिस ASI फर्जी मार्कशीट मामले में अब पुलिस दस्तावेजों के साथ-साथ नौकरी हासिल करने की पूरी प्रक्रिया की जांच करेगी।पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित तौर पर गलत दस्तावेज कहां से तैयार हुआ और नियुक्ति के समय उसे किस तरह इस्तेमाल किया गया। साथ ही यह भी जांच का हिस्सा होगा कि भर्ती के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ था।
अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ा है मामला
शुरुआती जांच में सामने आया है कि कौशलेंद्र सिंह चौहान की नियुक्ति अनुकंपा के आधार पर हुई थी। आरोप है कि नौकरी पाने के दौरान उन्होंने शैक्षणिक रिकॉर्ड के तौर पर कथित फर्जी दस्तावेज पेश किया। हालांकि, इन आरोपों की पूरी सच्चाई अब पुलिस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से सामने आएगी। इंदौर पुलिस ASI फर्जी मार्कशीट मामले में फिलहाल आरोपों को जांच के आधार पर ही देखा जा रहा है।अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियुक्ति के समय दस्तावेजों की जांच करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ सकती है। इतने लंबे समय तक यह मामला विभागीय रिकॉर्ड में कैसे नहीं पकड़ा गया, इसकी भी जांच हो सकती है।
30 साल तक कैसे बचा रहा मामला?
इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर दस्तावेज में गड़बड़ी थी तो करीब तीन दशक तक इसकी जानकारी क्यों नहीं हो सकी। इंदौर पुलिस ASI फर्जी मार्कशीट मामले ने विभाग में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।पुलिस अब यह भी देखेगी कि नियुक्ति के समय दस्तावेजों का सत्यापन हुआ था या नहीं। अगर सत्यापन हुआ था तो बोर्ड के रिकॉर्ड में दस्तावेज नहीं मिलने की स्थिति कैसे बनी, यह भी जांच का अहम हिस्सा रहेगा।
अब पुलिस जांच से खुलेगा पूरा राज
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेज जुटा रही है। फर्जी मार्कशीट तैयार करने, उसे नौकरी में इस्तेमाल करने और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। इंदौर पुलिस ASI फर्जी मार्कशीट मामले में आगे और नाम या नए तथ्य सामने आते हैं या नहीं, इस पर भी नजर रहेगी।फिलहाल, करीब 30 साल पुरानी नौकरी से जुड़े इस मामले ने इंदौर पुलिस विभाग में हलचल बढ़ा दी है। अब जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि दस्तावेज वास्तव में फर्जी था या रिकॉर्ड से जुड़ी किसी दूसरी वजह से वह बोर्ड के पास उपलब्ध नहीं था।





