भोपाल। Nishaanebaz.com-MP Swamitva Yojana Crisis: मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना के तहत मकानों और जमीनों के पंजीयन का काम गंभीर तकनीकी संकट से गुजर रहा है। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश भर में स्वामित्व योजना के आधिकारिक पोर्टल की बेहद सुस्त चाल और बार-बार सर्वर डाउन होने से रजिस्ट्रियों की गति थम सी गई है। प्रशासन द्वारा निर्धारित किए गए विशाल लक्ष्यों को पूरा करने में मैदानी अमले, विशेषकर पटवारियों को अत्यधिक मानसिक तनाव व कार्यप्रणाली संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान स्थिति यह है कि पूरे दिन दफ्तर में बैठकर लगातार प्रयास करने के बाद भी एक पटवारी बमुश्किल 5 से 7 मकानों का ही पंजीयन पूरा कर पा रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर इस योजना को गति देने के लिए रोजाना एक हजार से अधिक रजिस्ट्रियां निष्पादित करने का बड़ा लक्ष्य तय किया गया है। हालांकि, धरातल पर वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। सुबह 6 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक यानी दिन के सबसे मुख्य कामकाजी घंटों के दौरान सर्वर या तो पूरी तरह से ठप रहता है या फिर पोर्टल की गति इतनी धीमी होती है कि डेटा अपलोड होना लगभग असंभव हो जाता है। घंटों कंप्यूटर के सामने बैठने के बाद भी काम आगे न बढ़ने से न केवल सरकारी मशीनरी का समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि प्रशासनिक लक्ष्यों को पाना भी व्यावहारिक रूप से नामुमकिन नजर आ रहा है।
यह पहला मौका नहीं है जब स्वामित्व योजना की जमीनी समीक्षा में इस तरह के गतिरोध सामने आए हों। इससे पहले भी मैदानी स्तर पर पटवारियों द्वारा इस योजना की व्यवस्थाओं और कार्यप्रणाली को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया जा चुका है। उस समय शासन और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से समस्याएं दूर करने के दिए गए ठोस आश्वासनों के बाद ही पटवारियों ने पुनः कार्य शुरू किया था। अब एक बार फिर से पैदा हुई इस बड़ी तकनीकी खामी और बेपटरी हुई सर्वर व्यवस्था ने प्रशासनिक तंत्र और धरातल पर काम कर रहे कर्मियों के बीच असमंजस व असंतोष की स्थिति उत्पन्न कर दी है।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि इस तकनीकी समस्या का तत्काल समाधान नहीं निकाला गया, तो योजना के तहत आम जनता को उनके संपत्ति अधिकारों के दस्तावेज समय पर दे पाना संभव नहीं होगा। फिलहाल पटवारी संघ और मैदानी अमला सर्वर क्षमता को बढ़ाने और पोर्टल की तकनीकी खामियों को जल्द से जल्द दूर करने की मांग कर रहा है, ताकि शासन द्वारा तय लक्ष्यों को बिना किसी व्यवधान के समयसीमा में पूरा किया जा सके।