कम उम्र में क्यों कमजोर होने लगती हैं हड्डियां?
हड्डियां शरीर को सहारा देने के साथ चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। लेकिन उम्र बढ़ने से पहले ही कुछ लोगों में हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है। इसके पीछे खानपान में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी, शारीरिक गतिविधियों का अभाव और कुछ बीमारियां जिम्मेदार हो सकती हैं। हड्डियों से जुड़ी ऐसी ही एक समस्या ऑस्टियोपोरोसिस है, जिसमें हड्डियां कमजोर और भंगुर हो जाती हैं। इससे मामूली गिरने या हल्के दबाव में भी फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ सकता है।
क्या है ऑस्टियोपोरोसिस?
ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें हड्डियां कमजोर और खोखली होने लगती हैं। इससे हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है और उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है। शुरुआत में इसके लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते, लेकिन समय के साथ हल्की चोट लगने पर भी फ्रैक्चर हो सकता है। कैल्शियम और विटामिन डी की कमी, बढ़ती उम्र और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके जोखिम को बढ़ा सकती है।
किन लोगों में ज्यादा रहता है जोखिम?
महिलाओं में मेनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा परिवार में इस बीमारी का इतिहास, कम वजन, हार्मोन से जुड़ी समस्याएं और कैल्शियम या विटामिन डी की कमी भी जोखिम बढ़ा सकती हैं। धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन और लंबे समय तक निष्क्रिय रहना भी हड्डियों की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं।
30 साल की उम्र से पहले क्यों जरूरी है देखभाल?
बचपन, किशोरावस्था और युवावस्था में हड्डियों का विकास तेजी से होता है। आमतौर पर लगभग 30 साल की उम्र तक व्यक्ति अपने अधिकतम बोन मास के करीब पहुंचता है। इस दौरान पर्याप्त पोषण और नियमित व्यायाम से मजबूत हड्डियां विकसित करने में मदद मिलती है। इसके बाद उम्र के साथ हड्डियों का घनत्व धीरे-धीरे कम हो सकता है। इसलिए हड्डियों की देखभाल बुजुर्ग होने के बाद नहीं, बल्कि बचपन से ही शुरू करना जरूरी है।
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए क्या करें?
अपने खानपान में दूध, दही, पनीर, रागी, तिल, दालें और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें। कैल्शियम के साथ विटामिन डी भी जरूरी है, क्योंकि यह शरीर को कैल्शियम अवशोषित करने में मदद करता है। धूप से विटामिन डी मिल सकता है, लेकिन इसकी मात्रा मौसम, त्वचा और अन्य कारकों पर निर्भर करती है। सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
रोजाना पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना और व्यायाम करना हड्डियों के लिए फायदेमंद हो सकता है। मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज और संतुलन का अभ्यास भी गिरने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। धूम्रपान से बचें और शराब का सेवन न करें या सीमित रखें। यदि कम उम्र में ही फ्रैक्चर हो, लगातार पीठ दर्द रहे या परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास हो, तो डॉक्टर से जांच के बारे में बात करें।