Last Surya Grahan 2025 : साल 2025 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 21 सितंबर रात 10:59 बजे से 22 सितंबर सुबह 3:23 बजे तक चलेगा। यह आंशिक सूर्य ग्रहण भारत के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। धार्मिक मान्यताओं और विज्ञान दोनों के अनुसार ग्रहण का समय विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है। इसी कारण, शास्त्रों में ग्रहण के दौरान सोने से बचने की सलाह दी गई है।
Last Surya Grahan 2025 : ग्रहण क्या है?
ग्रहण एक खगोलीय घटना है जब कोई खगोलीय पिंड किसी दूसरे पिंड के प्रकाश को आंशिक या पूरी तरह से रोक देता है। सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, जिससे सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाता।
ग्रहण के दौरान सोने से बचने के धार्मिक कारण
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नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव: शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के समय वायुमंडल में नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय हो जाती है। सोने से व्यक्ति पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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पाप और दोष: कुछ धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि ग्रहण के समय सोने से व्यक्ति पाप का भागी बन सकता है। यह समय पूजा, जप और ध्यान के लिए उत्तम माना गया है।
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स्वास्थ्य पर असर: ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहण का प्रभाव हमारी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर भी पड़ता है। इसलिए इस दौरान जागरूक और सक्रिय रहना उचित होता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
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सौर विकिरण में कमी: ग्रहण के दौरान सूर्य की किरणें पूरी तरह नहीं पहुंचतीं, जिससे शरीर की जैविक घड़ियों और नींद के पैटर्न पर असर पड़ सकता है।
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मानसिक और शारीरिक प्रभाव: ग्रहणकाल में हल्का डर, बेचैनी और तनाव की अनुभूति हो सकती है। सोने से व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर हो सकता है।
ग्रहण के दौरान क्या करें
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पूजा-पाठ और मंत्र जाप: इस समय पूजा, मंत्रों का जाप और ध्यान करना शुभ माना जाता है।
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दान-पुण्य: ग्रहण के बाद स्नान कर दान-पुण्य करें। यह दुष्प्रभाव कम करने में मदद करता है।
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सावधानी: गर्भवती महिलाओं और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
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भोजन से परहेज: ग्रहण के दौरान भोजन करने से बचना चाहिए।













