कटनी, मध्य प्रदेश: कटनी जिले के मंडी परिसर में लगभग 10 वर्षों से पड़े धान के स्टॉक को उठाने में प्रशासन और मध्य प्रदेश सिविल कॉरपोरेशन की लापरवाही सामने आई है। किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान को मिलिंग के लिए स्टॉक किया गया था, लेकिन आज तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। परिणामस्वरूप करोड़ों रुपए की धान पूरी तरह से खराब हो चुकी है।
मंडी परिसर में हालात: धान से सब्जी तक
10 साल पहले स्टॉक किए गए धान के लिए जो सेड निर्धारित था, वह अब सब्जी बेचने वालों को एलॉट कर दिया गया है। मंडी परिषद के अधिकारियों और मंडी सचिव को इसकी जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। धान को उठाने में विलंब से न केवल करोड़ों का नुकसान हुआ, बल्कि गरीबों को मिलने वाला अनाज भी उनके हाथ से चला गया।
किसानों की नाराजगी
ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, किसान अनिल सिंह सेंगर ने प्रशासन की इस लापरवाही पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि गरीबों के निवाले को प्रशासन की अनदेखी और अधिकारियों की मिलीभगत से छीना गया है। किसानों की मेहनत और सरकारी धन दोनों इस मामले में बर्बाद हो गए हैं।
प्रशासन की नींद
मिली जानकारी के अनुसार, सिविल कॉरपोरेशन के अधिकारी और मंडी सचिव 10 साल से इस स्टॉक की अनदेखी कर रहे हैं। करोड़ों रुपए के नुकसान के बाद भी प्रशासन जागरूक नहीं हुआ और धान के उठाव में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।













