नई दिल्ली :कर्नाटक में राजनीतिक हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। बीते शनिवार को दिल्ली में सोनिया गांधी के आवास पर कांग्रेस आलाकमान की बैठक हुई, जिसमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य कर्नाटक की वर्तमान सरकार की स्थिति और नेतृत्व परिवर्तन पर विचार करना था। राज्य में पिछले कुछ हफ्तों से सियासी उठापटक लगातार बढ़ रही है, जिससे बेंगलुरु से लेकर दिल्ली तक चर्चा का दौर जारी है।
सियासी अटकलें
कर्नाटक में 2023 विधानसभा चुनाव के बाद ‘Rotational CM Formula’ के तहत सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया था। अब ढाई साल पूरा होने के बाद डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग गहराती जा रही है। शिवकुमार गुट के कई नेता राज्य में सत्ता की कमान डीके को सौंपने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, सिद्धारमैया ने भी कभी पूरे पांच साल बजट पेश करने की बात की और कभी कहा कि इस तरह के निर्णय आलाकमान को लेने होंगे।
Read More : Indigo फ्लाइट संकट बरकरार! रायपुर, दिल्ली और मुंबई से 234 उड़ानें रद्द, यात्रियों में अफरा-तफरी
डीके शिवकुमार के बयान का महत्व
डीके शिवकुमार ने कहा, “ईश्वर न तो वरदान देता है और न ही श्राप, वह केवल अवसर देता है। हम उन अवसरों का क्या उपयोग करते हैं, यही महत्वपूर्ण है। हमारा जन्म हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना पूरी तरह हमारे हाथ में है। यही कार्य हमारी सरकार आगे बढ़ा रही है।” उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक नेतृत्व परिवर्तन के संकेत के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके शब्दों ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि राज्य में भविष्य में बड़ा बदलाव हो सकता है।
राज्य में आगे की संभावनाएं और राजनीतिक माहौल
विश्लेषकों का मानना है कि डीके शिवकुमार के बयान से कर्नाटक में राजनीतिक हलचल और तेज हो सकती है। आलाकमान की बैठक और नेताओं के बीच लगातार हो रही चर्चाएं राज्य की सियासी दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। शिवकुमार के बयान से संकेत मिलता है कि कांग्रेस पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन पर गंभीर चर्चा चल रही है।
राजनीतिक रणनीति और जनता की प्रतिक्रिया
राज्य के राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि कांग्रेस आलाकमान को इस मुद्दे पर संतुलित निर्णय लेना होगा, ताकि सरकार स्थिर रहे। वहीं, जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच यह बयान उत्सुकता और उम्मीद दोनों पैदा कर रहा है। भविष्य में नेतृत्व परिवर्तन राज्य की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है।













