CG High Court Verdict: रायपुर जेल में बंद उज्बेकिस्तानी युवतियों को राहत, हाई कोर्ट ने दिया देश भेजने का आदेश

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CG High Court Verdict: बिलासपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राजधानी रायपुर के डिटेंशन सेंटर (जेल) में बंद उज्बेकिस्तान की दो महिला नागरिकों को एक बड़ी राहत दी है। लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय समन्वय के बाद हाई कोर्ट ने दोनों विदेशी महिलाओं— फेरूजा सबिरोवा और दिनोरा सफ्युतदिनोवा की वतन वापसी का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है। माननीय न्यायालय ने भारत में उज्बेकिस्तान के राजदूत (दूतावास) और छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की आपसी सहमति के आधार पर दोनों महिलाओं को जल्द से जल्द उनके देश डिपोर्ट (निर्वासित) करने की प्रक्रिया पूरी करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

जनवरी में रायपुर के बुटिक होटल से हुई थी गिरफ्तारी

इस पूरे मामले की शुरुआत जनवरी 2026 में हुई थी। रायपुर की तिल्दा और स्थानीय पुलिस की टीम ने 9 जनवरी 2026 को वीआईपी रोड स्थित ‘होटल एरिना बुटिक’ में छापा मारकर इन दोनों उज्बेकिस्तानी युवतियों को संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने की आशंका के चलते हिरासत में लिया था। हिरासत में लिए जाने के बाद जब पुलिस प्रशासन ने दोनों से भारत में रहने से संबंधित वैध कागजात मांगे, तो वे सही दस्तावेज पेश नहीं कर सकीं। गहन जांच में खुलासा हुआ कि दिनोरा सफ्युतदिनोवा का भारतीय वीजा काफी समय पहले ही समाप्त हो चुका था, जबकि फेरूजा सबिरोवा के पास कोई वैध पासपोर्ट ही मौजूद नहीं था।

दो महीने की कड़ी पूछताछ के बाद भेजी गई थीं डिटेंशन सेंटर

गिरफ्तारी के बाद शुरुआती दौर में दोनों विदेशी महिलाओं ने पुलिस का सहयोग नहीं किया। करीब दो महीने तक चली लंबी पूछताछ के बावजूद उन्होंने अपने घर-परिवार, स्थानीय संपर्कों और भारत आने के मुख्य उद्देश्यों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इसके बाद पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए 13 मार्च को दोनों के खिलाफ फॉरेनर्स एक्ट के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें विधिवत गिरफ्तार किया। तब से दोनों महिलाओं को रायपुर के शासकीय डिटेंशन सेंटर में न्यायिक अभिरक्षा में रखा गया था।

दूतावास और राज्य सरकार के रुख से आसान हुई राह

इस बीच, भारत स्थित उज्बेकिस्तान दूतावास ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए दोनों नागरिकों के आवश्यक पहचान और यात्रा दस्तावेज (इमर्जेंसी सर्टिफिकेट) भारत सरकार को उपलब्ध कराने का लिखित आश्वासन दिया। दूतावास की इस सक्रियता और मानवीय दृष्टिकोण को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने भी दोनों को वापस भेजने पर अपनी सहमति दे दी। हाई कोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि जब दोनों देश के प्राधिकरण और राज्य सरकार सहमत हैं, तो इसमें कोई वैधानिक आपत्ति नहीं है। कोर्ट ने गृह विभाग और स्थानीय प्रशासन को आदेश दिया है कि डिपोर्टेशन की कागजी कार्रवाई को अविलंब पूरा कर दोनों को उज्बेकिस्तान रवाना किया जाए।

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