CG MNREGA: जशपुर जिला पंचायत अपडेट: पण्डरसिली के आश्रित ग्राम में सिंचाई संकट दूर, धरातल पर दिखा असर

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CG MNREGA:गौरी शंकर गुप्ता/जशपुर। छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य जशपुर जिले से ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण और सकारात्मक खबर सामने आ रही है। जिले के मनोरा विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पण्डरसिली के आश्रित ग्राम गुतकिया में वर्षों से बंद और पूरी तरह से बेकार हो चुकी एक पुरानी सिंचाई योजना को प्रशासन की विशेष पहल से नया जीवन मिल गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी ‘प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना’ के तहत देश के सिंचित कृषि क्षेत्रों का तेजी से विकास करने के लक्ष्यों को पूरा करने और राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप पुरानी व बंद पड़ी योजनाओं को दोबारा जमीनी स्तर पर पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से जशपुर जिले में यह बड़ी प्रशासनिक और तकनीकी उपलब्धि हासिल की गई है।

जल संसाधन विभाग द्वारा ग्राम गुतकिया में इस अहम सिंचाई परियोजना के जीर्णोद्धार और मरम्मत का कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है।

मनरेगा और जल संसाधन विभाग के समन्वय से हुआ कार्य

कार्यालय जिला पंचायत जशपुर द्वारा जारी किए गए आधिकारिक प्रशासकीय स्वीकृति आदेश के तहत इस पूरे जीर्णोद्धार और मरम्मत कार्य को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा के अंतर्गत वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई थी। इस महत्वपूर्ण कार्य का नाम गुतकिया व्यपवर्तन योजना नहर मरम्मत कार्य रखा गया था, जिसके क्रियान्वयन की पूरी जिम्मेदारी जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) जशपुर को सौंपी गई थी। इस पूरी परियोजना के तकनीकी और व्यावहारिक सुधार के लिए प्रशासन द्वारा कुल ग्यारह लाख अन्ठानबे हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। इस बजट के माध्यम से विभाग ने नहर की दीवारों को मजबूत करने, गाद निकालने और पानी के प्रवाह को सुचारू बनाने का काम किया है।

इस पुरानी निष्क्रिय योजना के पुनर्जीवित होने से स्थानीय स्तर पर जल संकट और सिंचाई की समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो गई है।

खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए मिलेगा पर्याप्त पानी

इस नहर मरम्मत योजना के जमीनी स्तर पर पूरी तरह से संपन्न होने से ग्राम गुतकिया और उसके आसपास के क्षेत्र की लगभग सौ एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि को अब बारह महीने पानी मिल सकेगा। स्थानीय किसानों को अब अपनी खरीफ और रबी दोनों ही सीजन की फसलों के लिए सुचारू रूप से और बिना किसी बाधा के सिंचाई की बेहतरीन सुविधा प्राप्त होगी। इस योजना के धरातल पर उतरने से न केवल क्षेत्र के कुल कृषि उत्पादन में भारी वृद्धि दर्ज की जाएगी, बल्कि इस सुदूर ग्रामीण अंचल में जीवन यापन करने वाली स्थानीय आदिवासी जनजातियों के जीविकोपार्जन और आर्थिक स्तर में भी अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।

सिंचाई की उचित व्यवस्था होने के बाद अब किसान पारंपरिक धान की खेती के अलावा अन्य नगदी फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं।

कृषि विभाग ने किसानों को अन्य फसलों के लिए किया प्रेरित

गांव में सिंचाई की सुविधा सुदृढ़ और सुनिश्चित होने के फलस्वरूप जिला कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा भी स्थानीय किसानों को विशेष रूप से प्रशिक्षित और प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभाग की ओर से किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अब खेतों में केवल धान लगाने के अतिरिक्त अन्य कम पानी वाली और बाजार में अधिक मांग वाली लाभदायक दलहन, तिलहन और मौसमी सब्जियों की फसलें भी लें। इससे न केवल भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी, बल्कि किसानों की वार्षिक आय में भी बहुआयामी और टिकाऊ वृद्धि सुनिश्चित की जा सकेगी। प्रशासन के इस मार्गनिर्देशन से क्षेत्र के किसानों में अपनी आमदनी दोगुनी करने को लेकर एक नया विश्वास जागा है।

धरातल पर दिखा योजना का असर, ग्रामीणों में भारी उत्साह

इस पूरी महत्वपूर्ण परियोजना की सफलता और नहर में बहते पानी के सुखद असर को गांव की धरातलीय तस्वीरों में बहुत ही साफ तौर पर देखा जा सकता है। शासन द्वारा निर्धारित समय पर पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य पूर्ण कराए जाने से ग्राम गुतकिया, पण्डरसिली सहित आसपास के सभी स्थानीय ग्रामीण परिवारों और प्रगतिशील किसानों के बीच भारी उत्साह और हर्ष का माहौल व्याप्त है। राज्य और जिला शासन-प्रशासन का यह कल्याणकारी कदम आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में पारंपरिक कृषि को एक बेहद लाभदायक व्यवसाय में बदलने और सुदूर अंचल के सीधे-सादे ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त व आत्मनिर्भर करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।

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