निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : इंदौर शहर में एक बार फिर ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अंगदान की प्रेरक कहानी सामने आई है। खरगोन निवासी विजय जायसवाल की ब्रेन डेथ के बाद उनके परिजनों ने साहसिक निर्णय लेते हुए हृदय, लीवर और किडनी दान कर कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन देने का मार्ग प्रशस्त किया।
रात 2 बजे बना ग्रीन कॉरिडोर, अहमदाबाद पहुंचा दिल
डॉक्टरों की टीम और प्रशासन के समन्वय से Jupiter Speciality Hospital से एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया। देर रात करीब 2 बजे हृदय को विशेष व्यवस्था के साथ अहमदाबाद के Marengo CIMS Hospital भेजा गया, जहां जरूरतमंद मरीज का ट्रांसप्लांट किया जाएगा। समय के साथ दौड़ती इस पूरी प्रक्रिया ने चिकित्सा तंत्र की तत्परता को भी साबित किया।
इंदौर में लीवर और किडनी ट्रांसप्लांट की तैयारी
वहीं दान किए गए लीवर और एक किडनी से इंदौर के मरीजों का इलाज किया जाएगा। एक किडनी Choithram Hospital में ट्रांसप्लांट की जाएगी, जबकि अन्य अंगों से गंभीर मरीजों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद जगी है।
परिजनों के फैसले ने बचाईं कई जिंदगियां
ब्रेन डेथ जैसे कठिन क्षण में लिया गया परिजनों का यह निर्णय मानवता और सामाजिक जागरूकता की मिसाल बन गया है। अंगदान के इस कदम ने न केवल कई परिवारों को जीवन की नई रोशनी दी, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश भी पहुंचाया है।
अंगदान के प्रति बढ़ रही जागरूकता
इंदौर में लगातार बढ़ते अंगदान अभियान और ग्रीन कॉरिडोर की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि शहर में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ सामाजिक संवेदनशीलता भी मजबूत हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आएं, तो हजारों गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सकता है।
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इसी संदेश के साथ विजय जायसवाल का अंगदान एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसने साबित कर दिया कि मृत्यु के बाद भी जीवन बांटा जा सकता है।













