भोपाल/इंदौर: इंदौर में दूषित पानी की शिकायतों के सामने आने के बाद नगरीय प्रशासन हरकत में आ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव ने प्रदेशभर के नगरीय निकायों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुरक्षित, पारदर्शी और जनस्वास्थ्य के अनुकूल बनाना है।
7 दिन में पेयजल व्यवस्था का सर्वे
अपर मुख्य सचिव ने आदेश दिए हैं कि सभी नगरीय निकाय अपनी पेयजल वितरण प्रणाली का 7 दिनों के भीतर विस्तृत सर्वे करें और उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। विशेष रूप से उन पाइपलाइनों की पहचान की जाए जो 20 वर्ष से अधिक पुरानी हैं या जिनमें बार-बार लीकेज की समस्या सामने आ रही है।
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दूषित पानी की शिकायत इमरजेंसी में
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि दूषित पानी से जुड़ी सभी शिकायतों को “इमरजेंसी कैटेगरी” में रखा जाए। ऐसी शिकायतों का निराकरण अधिकतम 48 घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि किसी भी तरह की स्वास्थ्य आपदा से बचा जा सके।
CM हेल्पलाइन पर त्वरित कार्रवाई
सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त पेयजल संबंधी शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को जवाबदेही के साथ समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया है।
लीकेज डिटेक्शन और विशेष अभियान
नगरीय निकायों को पाइपलाइन लीकेज डिटेक्शन सिस्टम की जानकारी देने और इसके लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही जल आपूर्ति नेटवर्क की नियमित निगरानी और रखरखाव पर जोर दिया गया है।
पानी की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी
निर्देशों के अनुसार नियमित और रैंडम सैंपलिंग की जाए। 24 घंटे निगरानी व्यवस्था, पानी के नमूनों की लैब जांच, पानी की टंकियों की नियमित सफाई और आवश्यकता अनुसार क्लोरीन का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए।
अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि जल आपूर्ति में रिसाव की पहचान और पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्राथमिक जिम्मेदारी है। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।











