इंदौर : इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण कई लोगों की मौत और बीमारियों का मामला सामने आया है। इलाके के लोग महीनों से साफ पानी की मांग कर रहे थे और नगर निगम की हेल्पलाइन 311 पर सितम्बर में भी शिकायत दर्ज कराई गई थी। बावजूद इसके, जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दे पाए।
लोगों की लगातार शिकायतें
भागीरथपुरा के सोशल मीडिया ग्रुपों में लोगों ने लगातार नर्मदा का पानी उपयोग न करने की चेतावनी दी थी। स्थानीय लोगों ने नगर निगम को कई प्रमाण और शिकायतें भेजी थीं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
दूषित पानी से मौत और अस्पताल में भर्ती
25 दिसंबर से 30 दिसंबर के बीच इलाके में आठ लोगों की मौत हुई। हालांकि अधिकारियों ने केवल तीन मौतों की पुष्टि की है। गंदे पानी से लगभग 1,100 लोग उल्टी और दस्त जैसी बीमारियों से प्रभावित हुए। इनमें से 111 लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। इस घटना ने इंदौर, जिसे देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, की छवि को धक्का पहुंचाया है।
अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई
इस मामले के सामने आने के बाद जोनल प्रभारी शालिग्राम सितोले और सहायक यंत्री योगेश जोशी को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही, प्रभारी PHE उपन्यत्री शुभम श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक किया गया। अधिकारियों के खिलाफ ये कार्रवाई जनता और मीडिया के दबाव के बाद की गई है।
जनता में गहरा आक्रोश
भागीरथपुरा के लोगों ने नगर निगम की लापरवाही को लेकर आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते पानी की सफाई पर ध्यान दिया गया होता, तो कई मौतों को रोका जा सकता था। सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जो अधिकारियों की गैर-जिम्मेदाराना हरकतों को उजागर कर रहे हैं।











