Income Tax Department Raids : इंदौर / देवास (मध्यप्रदेश) : मध्यप्रदेश के इंदौर और देवास में सोमवार सुबह आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग ने बड़ी छापेमारी की है। यह कार्रवाई ज्वेलर्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) के प्रतिष्ठानों पर की गई है, जो फर्जी बिलिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट की धोखाधड़ी और GST चोरी से जुड़े मामलों में संदिग्ध पाए गए हैं। इस पूरे ऑपरेशन का केंद्र बिंदु है — “इंदौर-देवास में ज्वेलर्स और सीए पर IT छापे”, जो इन दिनों प्रदेश में चर्चित विषय बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, यह छापे सोमवार तड़के एक साथ कई टीमों द्वारा डाले गए। कार्रवाई उन ज्वेलर्स और सीए पर केंद्रित है जो कथित तौर पर बोगस बिलिंग के माध्यम से करोड़ों की GST चोरी में लिप्त हैं। अब तक संबंधित प्रतिष्ठानों या सीए के नामों का आधिकारिक रूप से खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन कार्रवाई जारी है और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
क्या है बोगस बिलिंग घोटाला?
बोगस बिलिंग का मतलब है — ऐसे लेन-देन दिखाना जो असल में कभी हुए ही नहीं, ताकि इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठाया जा सके। इस मामले में इनफ्लेटेड या नकली बिल बनाए गए और उन पर ITC क्लेम किया गया, जिससे सरकार को करोड़ों का राजस्व नुकसान हुआ।
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) भी जांच के घेरे में
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब सीए पर कार्रवाई हुई हो। हाल ही में विष्णु गोयल और उनके बेटे रवि गोयल पर ₹17 करोड़ की GST चोरी का मामला सामने आया था, जिसमें उनका सीए भी सह-अभियुक्त बनाया गया था। आयकर विभाग अब ऐसे सीए प्रोफेशनल्स की भूमिका को गंभीरता से ले रहा है, जो जानबूझकर टैक्स चोरी में मदद करते हैं।
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आयकर विभाग की संभावित कार्रवाई
यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो इन व्यापारियों और सीए पर कई कानूनी धाराएं लग सकती हैं, जैसे:
- GST अधिनियम के तहत जुर्माना और मुकदमा
- आयकर अधिनियम की धारा 132 के तहत आपराधिक मामला
- सीए का लाइसेंस निलंबन/रद्दीकरण
- बैंक खाते और संपत्ति सील करना
- जरूरत पड़ने पर विभाग प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मदद भी ले सकता है।
आधिकारिक बयान का इंतजार
एक वरिष्ठ आयकर अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया : “इंदौर और देवास में एक बड़ी कार्रवाई चल रही है, जो बोगस बिलिंग और GST धोखाधड़ी से जुड़ी है। जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, आगे और जानकारी दस्तावेजों की जांच के बाद दी जाएगी।”
क्यों है ये मामला गंभीर?
भारत सरकार को फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट जैसे मामलों से हर साल हजारों करोड़ों का नुकसान होता है। GST काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में फर्जी ITC मामलों से ₹70,000 करोड़ से अधिक की कर चोरी हुई है। इस तरह की गतिविधियाँ देश के टैक्स सिस्टम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर चोट करती हैं।
आगे क्या हो सकता है?
- छापेमारी 1-2 दिन तक चल सकती है
- डिजिटल डिवाइसेज़ और अकाउंट बुक्स की फॉरेंसिक जांच
- ज़ब्त दस्तावेज़ों से और नाम सामने आ सकते हैं
- संबंधित CAs को ICAI से अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है













