होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चीन ने अमेरिका को दी खुली चुनौती, बोला- हमारे मामलों में दखल न दे अमेरिका

Rahul Goshwami

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :  मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट का रूप लेता दिख रहा है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका, ईरान और चीन के बीच टकराव तेज हो गया है। पहले ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष के बाद सीजफायर की उम्मीद बनी थी, लेकिन हालिया घटनाओं ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

ट्रंप के ब्लॉकेड ऐलान से बढ़ा तनाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज स्ट्रेट के आसपास आने-जाने वाले जहाजों की निगरानी और रोकथाम की प्रक्रिया शुरू करेगी। इस कदम को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

ट्रंप के इस बयान के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी की आशंका बढ़ गई है और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता देखने को मिल रही है।

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चीन की कड़ी प्रतिक्रिया

चीन ने अमेरिका के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीनी रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने स्पष्ट कहा है कि अमेरिका को ईरान के साथ चीन के ऊर्जा और व्यापारिक संबंधों में दखल नहीं देना चाहिए।

चीन ने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट उसके लिए “खुला और सुरक्षित मार्ग” रहना चाहिए, क्योंकि यह उसके ऊर्जा आयात का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है।

चीन की ऊर्जा निर्भरता और रणनीतिक चिंता

विशेषज्ञों के अनुसार, चीन अपनी कुल तेल आपूर्ति का लगभग 40% और LNG का करीब 30% इसी मार्ग से प्राप्त करता है। ऐसे में किसी भी तरह की बाधा चीन की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।यही कारण है कि बीजिंग लगातार इस क्षेत्र में स्थिरता और सीजफायर की मांग कर रहा है।

अमेरिका की रणनीति पर सवाल

कुछ अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की यह रणनीति सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक वित्तीय व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

विशेषकर पेट्रो-डॉलर सिस्टम और चीन के युआन आधारित व्यापार नेटवर्क को लेकर भी नए भू-राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।

वैश्विक बाजारों पर असर

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह की बाधा सीधे तौर पर कच्चे तेल की कीमतों, सप्लाई चेन और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

फिलहाल दुनिया भर की नजरें इस पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और चीन के बीच यह तनाव किस दिशा में जाता है।

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