Monday, October 5, 2026
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Karur Rally : करूर रैली त्रासदी : मद्रास हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, परिजनों से वीडियो कॉल पर बातचीत शुरू

तमिलनाडु। करूर में 27 सितंबर को अभिनेता और टीवीके (तमिझगा वेत्री कजगम) प्रमुख थलपति विजय की रैली में मची भगदड़ ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में 41 लोगों की मौत और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। अब विजय ने पीड़ित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करना शुरू किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे अब तक 4 से 5 परिवारों से वीडियो कॉल के जरिए बात कर चुके हैं और संवेदना व्यक्त की है।

इससे पहले 4 अक्टूबर को मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के दौरान विजय और उनकी पार्टी को फटकार लगाई थी। जस्टिस एन सेंथिलकुमार ने कहा था कि घटना के बाद पार्टी ने कोई पछतावा या माफी नहीं दिखाई, और इस तरह अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक रैलियों में जन सुरक्षा की जिम्मेदारी आयोजकों की होती है।

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उधर, चेन्नई की भाजपा पार्षद उमा आनंदन ने इस हादसे की CBI जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस पर CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच 10 अक्टूबर को सुनवाई करेगी। इससे पहले हाईकोर्ट ने CBI जांच की याचिकाएं खारिज कर राज्य पुलिस की SIT जांच को सही ठहराया था। SIT की कमान IG असरा गर्ग को सौंपी गई है, जबकि अतिरिक्त मुआवजे की याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया गया है।

घटना के बाद विजय ने 30 सितंबर को एक वीडियो जारी कर कहा था—
“अगर बदला लेना है तो मुझसे लें, मेरे लोगों से नहीं। हमने कुछ गलत नहीं किया। मेरे पार्टी पदाधिकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, मैं मुख्यमंत्री से अपील करता हूं कि उन्हें नुकसान न पहुंचाया जाए।” विजय ने साथ ही घोषणा की कि उनकी पार्टी 20 अक्टूबर तक सभी रैलियां स्थगित करेगी और मृतकों के परिवारों को 20 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी।

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घटना के बाद सामने आईं तस्वीरों में भगदड़ का भयावह मंजर दिखाई दिया — जगह-जगह चप्पलों के ढेर और विलाप करते परिजन। यह हादसा न केवल सुरक्षा प्रबंधन की विफलता की ओर इशारा करता है, बल्कि राज्य में बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच जनता की जान की कीमत पर सत्ता पाने की होड़ को भी उजागर करता है।

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