भोपाल। भारतीय जनता पार्टी की नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के बाद पहली बार देर रात पार्टी के शीर्ष नेताओं ने टीम हेमंत खंडेलवाल की ‘क्लास’ ली। वर्चुअल माध्यम से आयोजित इस बैठक में राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में नए पदाधिकारियों को आचरण, व्यवहार, बात करने का सलीका और कार्यशैली को लेकर सख्त निर्देश दिए गए।
बैठक में प्रदेश नेतृत्व ने साफ कहा कि, “पदाधिकारियों के आचरण से ही पार्टी की छवि बनती या बिगड़ती है।” नेताओं को हिदायत दी गई कि वे ऐसा कोई भी काम न करें जिससे पार्टी की छवि खराब हो या कार्यकर्ताओं के मन पर विपरीत प्रभाव पड़े। संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में पदाधिकारियों का आचरण भाजपा की रीति-नीति के अनुरूप रहना चाहिए। उन्हें ‘डाउन-टू-अर्थ’ रहकर सबको साथ लेकर चलना होगा। बैठक के दौरान अनुशासन, संवाद और संगठनात्मक एकजुटता पर भी विशेष जोर दिया गया।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बैठक में कई दिशा-निर्देश तय किए गए हैं जिनमें सोशल मीडिया पर बयानबाज़ी से बचने, क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं से समन्वय बढ़ाने और संगठन की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने पर बल दिया गया। प्रदेश नेतृत्व ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा में पद जिम्मेदारी का प्रतीक है, अधिकार का नहीं।
इस बैठक पर विपक्ष ने भी तंज कसा है। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि, “बिहार में चुनाव चल रहे हैं और यहां भाजपा अपने नए पदाधिकारियों को ऑनलाइन नसीहतें दे रही है। जिन लोगों को कार्यकारिणी में जगह दी गई है, उन्हें न अनुभव है न आइडिया। भारी-भरकम नेता अब बीजेपी में हाशिए पर हैं। कांग्रेस छोड़कर आए लोगों को भी स्थान नहीं मिला। यह सब डैमेज कंट्रोल की कवायद है क्योंकि बीजेपी खुद डर में है।”
कांग्रेस के इस बयान पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा, “हम कांग्रेस थोड़ी हैं, जहां कुर्ते-चप्पल फट रहे हैं और नेता भाग रहे हैं। यह भाजपा है — संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो। हर कार्यकर्ता को काम देना और वरिष्ठों का सम्मान करना ही हमारी कार्यशैली है। दीनदयाल उपाध्याय जी के सपनों को साकार करना और मोदी जी के विकसित भारत अभियान को गति देना ही हमारा लक्ष्य है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की यह बैठक सिर्फ दिशा-निर्देश नहीं, बल्कि नई टीम के लिए ‘संगठनात्मक संस्कारों’ की पाठशाला थी। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की नई टीम पर अब यह जिम्मेदारी है कि वह प्रदेश में संगठन की छवि और कार्यप्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाए।













