सिंगरौली : सिंगरौली जिले की चितरंगी तहसील स्थित गोरहा पहाड़ क्षेत्र में प्रस्तावित स्वर्ण खनन परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया के तहत जनसुनवाई आयोजित की गई। मध्य प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की देखरेख में ग्राम पंचायत सिलफोरी में संपन्न इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
परियोजना का दायरा और उत्पादन क्षमता
परियोजना प्रस्तावक मेसर्स कुंदन गोल्ड माइंस प्राइवेट लिमिटेड ने बताया कि खनन क्षेत्र का कुल प्रस्तावित विस्तार लगभग 149.30 हेक्टेयर होगा। इसके अंतर्गत प्रतिवर्ष 0.13 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क उत्पादन तथा कुल 1.12 मिलियन टन खुदाई की योजना है, जिसमें अपशिष्ट सामग्री भी शामिल होगी। कंपनी का दावा है कि परियोजना से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा और रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।
ग्रामीणों की मांगें—पुनर्वास से लेकर रोजगार तक
जनसुनवाई के दौरान प्रभावित गांवों के लोगों ने खनन शुरू होने से पहले आवासीय व्यवस्था, उचित मुआवजा, पुनर्वास नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, बेहतर शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाएं और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने की मांग रखी। साथ ही श्रमिकों के लिए उचित वेतन और आधुनिक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
कंपनी ने दिया भरोसा, नियमों के पालन की बात
कंपनी प्रबंधन ने ग्रामीणों की चिंताओं को गंभीरता से लेने और सभी निर्णय पारदर्शी तरीके से करने का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरणीय मानकों और सरकारी नियमों का पालन सुनिश्चित करते हुए ही परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
सुझावों के आधार पर आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनसुनवाई में प्राप्त सभी आपत्तियां और सुझाव अंतिम रिपोर्ट में शामिल किए जाएंगे। इसी रिपोर्ट के आधार पर परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति पर आगे निर्णय लिया जाएगा।
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कई गांवों पर संभावित प्रभाव
सिलफोरी, कतरिहार, सिधरी, सिरगुड़ी, सिधार, भोष, खैरान और गौरहवा सहित आसपास के कई गांव इस परियोजना से प्रभावित हो सकते हैं। ग्रामीणों ने मांग की कि इन क्षेत्रों के लोगों को रोजगार, पुनर्वास और विकास योजनाओं में प्राथमिकता दी जाए।
विकास की दिशा में अहम पहल
विशेषज्ञों के अनुसार गोरहा पहाड़ स्वर्ण खनन परियोजना क्षेत्रीय विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, बशर्ते पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय हितों को समान महत्व दिया जाए।













